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ईरानी मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया

ईरान के छह मंत्रियों और 15 गवर्नरों ने संसदीय चुनावों के लिए भारी संख्या में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराए जाने के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया है.

उन्होंने ये कहते हुए इस्तीफ़ा दिया है कि अगर इस महीने के अंत तक उम्मीदवारों के बारे में फ़ैसला बदला नहीं जाता तो उनका त्यागपत्र अमल में आ जाएगा.

ईरान में अगले महीने संसदीय चुनाव होने हैं.

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद अली अब्ताही ने कहा, "ये राजनीतिक संकट तभी टल सकता है जब रूढ़िवादियों के वर्चस्व वाली शीर्ष परिषद या शूरा-ए-निगेहबान अपने फ़ैसले को वापस ले लेती है".

उन्होंने कहा कि साथ ही परिषद को अयोग्य ठहराए गए उम्मीवारों की सूची का फिर से जायज़ा लेना होगा.

उपराष्ट्रपति मोहम्मद अली अब्ताही ने मंत्रिमंडल की साप्ताहिक बैठक के बाद बुधवार को ये चेतावनी दी.

उन्होंने कहा कि कुछ मंत्रियों ने अपने त्यागपत्र पहले ही सौंप दिए हैं मगर वे तब तक अपने पदों पर बनें रहेंगे जब तक कि अयोग्य ठहराए गए उम्मीदवारों की सूची का दोबारा जायज़ा नहीं लिया जाता.

राष्ट्रपति की मंज़ूरी

ईरान के क़ानून के मुताबिक़ इन मंत्रियों के इस्तीफ़े मंज़ूर किए जाने के लिए राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी की स्वीकृति ज़रूरी है.

मगर ख़ातमी इस वक़्त विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में भाग लेने स्विट्ज़रलैंड गए हुए हैं.

प्रेक्षकों का मानना है कि सुधारवादियों का ये क़दम रूढिवादियों पर दबाव डालने की एक नई कोशिश है.

बुधवार को शूरा-ए-निगेहबान ने एलान किया था कि अयोग्य ठहराए गए 3600 लोगों में से 200 लोगों की उम्मीदवारी बहाल कर दी गई है.

उसने ये भी कहा था कि वो हज़ारों अन्य उम्मीदवारों के मामलों की फिर से जाँच-परख करने का काम जारी रखेगी.

शूरा-ए-निगेहबान ने देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के आदेश के बाद इन लोगों की उम्मीदवारी बहाल की है.

परिषद को इस महीने के आख़िर तक अयोग्य ठहराए गए सभी उम्मीदवारों के मामलों की जाँच-पड़ताल का काम पूरा करना है.