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अमरीका लोगों के नाम गुप्त रख सकेगा

अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने बुश प्रशासन को हिरासत में रखे लोगों के नाम और अन्य जानकारियाँ गुप्त रखने की अनुमति दे दी है.

11 सितंबर, 2001 के हमले के बाद सैकड़ों लोगों को या तो गिरफ़्तार कर लिया गया था या हिरासत में ले लिया गया था.

अमरीकी अदालत में कुछ ग़ैर सरकारी संगठनों ने इन गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ अपील दायर की थी.

इन ग्रुपों का कहना था कि ये मामला सूचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का है.

इस पर न्यायाधीशों ने फ़ैसला दिया कि नाम ज़ाहिर करने से अमरीका की सुरक्षा को नुक़सान पहुँच सकता है.

अमरीकी अधिकारियों ने लगभग 700 लोगों को हिरासत में ले रखा है जिसमें अधिकतर मुसलमान हैं.

इनमें से अनेक अरब देशों देशों से हैं लेकिन कुछ लोग पाकिस्तान से भी हैं.

निंदा

इसके पहले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने क्यूबा में अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतनामो बे में बंदी बनाकर रखे गए लोगों को लेकर अमरीका की निंदा की थी.

संगठन का कहना है कि अमरीका ने इन लोगों को बिना किसी आरोप के दो साल से बंदी बनाकर रखा हुआ है.

न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि दो साल पहले इस शिविर में लाए गए 660 लोग यह नहीं जानते कि उन्हें किन आरोपों में बंदी बनाकर रखा गया है.

अमरीका ने इन बंदियों को "आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई" में ग़ैरक़ानूनी लड़ाके घोषित किया हुआ है.

ह्यूमन राइट्स वॉच का आरोप है कि अमरीका इन बंदियों के साथ जो बर्ताव कर रहा है उससे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन होता है.

इन बंदियों में बहुत से किशोर हैं और उन्हें दो साल पहले अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीकी नेतृत्व में हुए हमले के दौरान गिरफ़्तार किया गया था.

अमरीका कहता है कि ये लोग अल क़ायदा नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं.