ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली ख़मेनेई ने कहा है कि देश में मौजूदा संकट का समाधान क़ानूनी उपायों के ज़रिए ही निकाला जाना चाहिए.
ख़मेनेई को सरकार फ़ैसलों पर अंतिम राय देने का अधिकार है.
उन्होंने कहा है कि वे इस मामले में तभी दख़ल देंगे जब तमाम क़ानूनी उपाय अपना लिए जाएंगे.
उनसे पहले राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी ने देश में सुधारवादियों से शांति बनाए रखने की अपील करते हु कहा था कि राजनीतिक संकट का क़ानूनी उपायों से समाधान निकाला जाएगा.
ग़ौरतलब है कि ईरान की सर्वोच्च धार्मिक परिषद ने कुछ सुधारवादियों को अगले महीने होने वाले संसदीय चुनाव में उम्मीदवार बनने से अयोग्य क़रार दे दिया है जिससे एक राजनीतिक संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई है.
कोई 2000 सुधारवादियों को इस चुनाव में उम्मीदवार बनने से रोका गया है.
संसद के मौजूदा 70 सदस्यों को भी इस प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है.
ईरान के सभी 27 प्रांतों के गवर्नरों ने धमकी दी है कि प्रतिबंध वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में वे अपने इस्तीफ़े सौंप देंगे.
रविवार को 60 से ज़्यादा सुधारवादी सांसदों ने संसद के भीतर धरना दिया.
उन्होंने कहा है कि प्रतिबंध हटाए जाने तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
प्रतिबंधों के बारे में उपराष्ट्रपति मोहम्मद अली अबताही ने कहा, "स्थिति ऐसे फुटबॉल मैच जैसी है जिसमें रेफ़री ने एक टीम को मैदान से बाहर भेज दिया हो, और दूसरी टीम को गोल बनाने के लिए कहा हो."
तेहरान से बीबीसी के संवाददाता ने कहा है कि राजनीतिक संकट के गहराते जाने के मद्देनज़र ऐसा लगता है कि ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खमनेई ही शांति स्थापित कर सकते हैं.
राष्ट्रपति ख़ातमी ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता सर्वोच्च धार्मिक परिषद के तौर-तरीके लोकतांत्रिक हैं.
चुनाव के अयोग्य ठहराए गए लोगों में देश की प्रमुख सुधारवादी पार्टी आईआईपीएफ़ के नेता और राष्ट्रपति ख़ातमी के भाई मोहम्मद रज़ा ख़ातमी शामिल हैं.