अमरीकी अधिकारियों ने इराक़ी बंदियों की रिहाई शुरू कर दी है.
ख़बरों के अनुसार बग़दाद के बाहरी इलाक़ों से दो ट्रक क़ैदियों को लेकर बाहर जाते हुए देखे गए हैं.
इससे पहले इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने कहा था कि सदभावना के रूप में ये क़दम उठाया जा रहा है.
उन्होंने अन्य कई सौ इराक़ी बंदियों को रिहा करने की बात भी कही.
लेकिन पॉल ब्रेमर का कहना था, "उन लोगों को रिहा नहीं किया जाएगा जिनके हाथों पर खून लगा है."
इसके साथ ही अमरीकी प्रशासक ने कहा कि विद्रोहियों की तलाश में अभियान छेड़ा जाएगा.
ऐसा अनुमान है कि अमरीकी नेतृत्ववाली सेनाओं ने लगभग नौ हज़ार इराक़ियों को हिरासत में ले रखा है.
सद्दाम हुसैन की गिरफ़्तारी के बाद अमरीकी सेना ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था.
हमले जारी
दूसरी ओर इराक़ में हिंसा जारी है और अमरीकी सेना के अनुसार बुधवार को बग़दाद के पास एक हमले में 35 अमरीकी सैनिक घायल हो गए.
इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हालांकि कुछ अमरीकी कमांडरों के हवाले से ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि उन पर हमले कम हो रहे हैं लेकिन तथ्य ये है कि अमरीकी सैनिकों पर अब भी हमले जारी हैं.
इधर नीतियों के संबंध में सलाह देने वाले अमरीका के एक प्रभावशाली ग्रुप ने इराक़ में हमले को लेकर व्यापक विनाश के हथियार के संबंध में भ्रामक जानकारी देने के लिए अमरीकी प्रशासन की आलोचना की है.
कार्नेगी एन्डाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस का कहना है कि उसने पिछले छह महीनों में सैकड़ों दस्तावेज़ों का अध्ययन किया है और अनेक रिपोर्टों को पढ़ा है.
अपनी रिपोर्ट में इसने कहा कि सरकारी अधिकारियों ने इराक़ के संभावित परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों के खतरे को मिलाकर पेश किया जबकि इनके खतरे अलग-अलग थे.
इस ग्रुप का कहना है कि अमरीकी प्रशासन ने बिना किसी सबूतों के ये कहा कि सद्दाम ऐसे हथियारों को आतंकवादियों को सौंप सकते हैं.