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मौत को चकमा दिया

इसे क़ुदरत के किसी करिश्मे से कम नहीं कहा जाएगा कि तेरह दिन तक मलबे में दबे रहने और बिना खाना-पानी के भी कोई ज़िंदा बच सकता है.

ईरान में ऐसा करिश्मा हुआ है. कुछ दिन पहले जब वहाँ भूकंप आया था तो कई दिन तो खोजबीन करने के बाद राहतकर्मियों ने यह उम्मीद छोड़ दी थी कि कोई मलबे में जीवित भी बचा रह सकता है.

यहाँ तक कि राहतकर्मियों ने कह दिया था कि अगर कोई जीवित बचा भी होगा तो तीन या चार दिन तक पानी ना मिलने की स्थिति में वह जीवित नहीं बच सकता.

अब 13 दिन बाद मलबे से जिस व्यक्ति को जीवित निकाला गया है उनकी उम्र 56 साल है और नाम बताया गया है जलील.

जलील को बुधवार रात को मलबे से निकाला गया और तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया. इस समय वह गंभीर रूप से बीमार है.

अब अधिकारियों का कहना है कि जलील शायद इसलिए बच सके क्योंकि एक अलमारी के नीचे उन्हें कुछ सुरक्षित जगह मिल सकी.

रेडक्रॉस के प्रवक्ता डेनिस मैकलीन ने कहा कि जलील अपना नाम बताने के बाद बेहोश हो गए.

"वह अभी बेहोश हैं और उनकी हालत वाक़ई बहुत गंभीर है."

अस्पताल के एक डॉक्टर का कहना था कि जलील को किसी ज़रिए से पानी तो मिल रहा था लेकिन खाना नहीं मिल सका.

बचावकर्मियों ने एक पड़ोसी के यह कहने पर काम शुरू किया कि जलील का शव बरामद नहीं किया जा सका था.

इससे पहले तीन जनवरी को 97 साल की एक महिला मलबे से जीवित बच सकी थी.

ध्यान रहे कि ईरान के बाम स्थान पर 26 दिसंबर को आए इस भूकंप में तीस हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस और रेडक्रॉस क्रेसेंट के महासंघ ने भूकंप से प्रभावित दो लाख से ज़्यादा लोगों की अगले आठ महीने में सहायता के लिए कम से कम चार करोड़ डॉलर मुहैया कराने की अपील की है.