ईरान के बाम शहर में पिछले शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकंप के बाद वहाँ बेघर हुए एक लाख से ज़्यादा लोगों की सहायता के लिए राहत सामग्री भेजी जा रही है.
शहर के छोटे से हवाई अड्डे पर दवाएँ, भोजन, पानी, कंबल और तंबू पहुँच रहे हैं.
चालीस देशों से आए सहायता दल शहर के उन हज़ारों लोगों की मदद में जुटे हुए हैं जिन्हें मुश्किलों के बीच लगातार छठी खुले आसमान के नीचे बितानी पड़ी.
भूकंप ने शहर के 90 प्रतिशत घरों को मलबों में बदल दिया है और कम-से-कम एक लाख लोग बेघर हो चुके हैं.
कहा जा रहा है कि भूकंप में मरनेवालों की संख्या 50 हज़ार तक जा सकती है.
शहर की चिकित्सा व्यवस्था लगभग तबाह हो चुकी है और अंतरराष्ट्रीय दल वहाँ अस्थायी अस्पताल बना रहे हैं.
अमरीकी दल
ईरान में भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए अमरीकी दल भी पहुँचा है और ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार अमरीकी अधिकारी वहाँ पहुँचे हैं.
इस दल में 80 सदस्य है और वे बाम में एक अस्थायी अस्पताल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी ने अमरीकी सहयोग का स्वागत किया है मगर साथ ही ये भी स्पष्ट किया है कि इससे दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
अमरीकी दल के एक प्रवक्ता ने ईरान में अमरीकी दल के पहुँचने को ऐतिहासिक अवसर बताया है और कहा है कि वे वहाँ मानवीय सहायता के लिए ऐसे ही पहुँचे हैं जैसे वे किसी और देश में ऐसे मौक़ों पर जाते हैं.
प्रवक्ता डेवी पर्क्स ने कहा,"हमें लगता है कि ये ऐतिहासिक अवसर है मगर इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है".
मारे गए लोग
अभी तक लगभग 30 हज़ार शवों को मलबों से निकाला गया है और उन्हें सामूहिक तौर पर दफ़नाया जा चुका है.
लेकिन मारे गए लोगों की ठीक-ठीक संख्या का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है क्योंकि कई परिवारों के सारे लोग मारे गए हैं.
साथ ही मारे गए लोगों के नाम दर्ज करानेवाला भी कोई नहीं रहा.
एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया,"अगर हम मानकर चलें कि हर घर में पाँच लोग रहते थे तो मारे गए लोगों की संख्या 50 हज़ार तक जा सकती है".
वैसे ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी ने पत्रकारों से कहा कि मारे गए लोगों की संख्या इतनी ऊपर नहीं जाएगी.
उन्होंने कहा कि दो साल के भीतर शहर को दोबारा बना लिया जाएगा.