ईरान में अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को बाम शहर में आए भूकंप में मरनेवालों की संख्या 50 हज़ार तक पहुँच सकती है.
यह आधुनिक समय की सबसे बड़ी त्रासदी हो सकती है.
बच गए लगभग एक लाख लोगों की देख-रेख कर रहे लोग और मदद की अपील कर रहे हैं.
अमरीकी सहायताकर्मियों ने भी राहत और बचावकार्य में मदद देनी शुरू कर दी है हालाँकि दोनों ही देशों के संबंध लंबे समय से ठीक नहीं रहे हैं.
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति ने अमरीकी मदद के लिए धन्यवाद तो दिया मगर ये भी कहा कि जब तक उनके देश के प्रति अमरीका की नीति नहीं बदलती बातचीत की कोई संभावना नहीं है.
सहायताकर्मियों का कहना है कि बचे लोगों की अगर ठीक से देखभाल नहीं की गई तो उनमें महामारी फैल सकती है.
इधर अधिकारियों के अनुसार अब तक 30 हज़ार शवों को बाम शहर और इसके आस-पास सामूहिक तौर पर दफ़नाया जा चुका है.
बाम शहर में चार दिन पहले आए भूकंप के बाद बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय राहत कार्य किया जा रहा है.
ज़रूरत
सहायता संस्थाएँ तंबू लगाने, भोजन बाँटने और दवाओं के वितरण में जुटी हुई हैं मगर उनके अनुसार अभी और राहत कार्य की ज़रूरत है.
राहतकर्मियों का कहना है कि सबसे ज़्यादा ज़रूरत बेघरों को आश्रय और पीने का पानी का इंतज़ाम करने की है.
वैसे अधिकारियों के अनुसार भूकंप के बाद कड़ाके की ठंढ में खुले में ही रात बिताने के बाद कुछ भूखे बच्चों ने दम तोड़ दिया है.
राहत कार्यों के बारे में विचार के लिए ईरान की सरकार के मंत्रिमंडल की मंगलवार को बैठक हो रही है.
इस बीच खाड़ी सहयोग परिषद के छह सदस्य देशों ने ईरान को 40 करोड़ डॉलर देने का वायदा किया है.
परिषद ने ईरान को सहायता दिए जाने के संयुक्त राष्ट्र के आह्वान के बाद ये घोषणा की.