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मलबे में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश

ईरान में आए भूकंप के बाद मलबे में फंसे लोगों को बचाने की कोशिशें सारी रात जारी रहीं.

शुक्रवार को आए इस भूकंप ने भारी तबाही मचाई है और अधिकारियों के अनुसार इसके कारण 25 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

ईरान सरकार ने भूकंप में मार गए लोगों की स्मृति में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.

राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी ने भूकंप को राष्ट्रीय आपदा बताते कहा है कि अकेले ईरान प्रकृति की इतनी बड़ी मार से नहीं निपट सकता.

शुक्रवार को आए इस भूकंप से प्रभावित हज़ारों लोगों को रात में जमा देने वाली ठंड का सामना करना पड़ा.

अनेक देशों ने सहायता की घोषणा की है.

अमरीका समेत विभिन्न देशों ने ईरान को सहायता का प्रस्ताव किया है.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि उनका देश मुसीबत के इस वक़्त में ईरान की मदद को तैयार है.

रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन ने सहायता दलों और सहायता आपूर्ति भेजने की पेशकश की है.

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने आर्थिक सहायता देने और जापान ने डॉक्टरी सहायता का प्रस्ताव रखा है.

समन्वय का प्रयास

संयुक्त राष्ट्र ने सहायता प्रयासों के समन्वय के लिए एक दल भेजने को कहा है.

साथ ही उसने 90 हज़ार डॉलर की तत्काल आपात सहायता की घोषणा की है.

सहायता एजेंसियाँ टेन्टों, कंबलों और खाद्य सामग्री को सुदूरवर्ती इलाक़ों में जल्दी से जल्दी पहुँचाने का प्रयास कर रही हैं.

तेहरान स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब चिंता मलबे में दबे लोगों को बचाने की है.

भूकंप प्रभावित बाम शहर को जाने वाली सड़कों पर आपात वाहन और अपने रिश्तेदारों की तलाश में जाने की कोशिश करनेवालों के कारण जाम हैं.

यह ऐतिहासिक शहर मलबे में तब्दील हो चुका है.

सोलहवीं सदी के आलीशान क़िले और दो अस्पतालों समेत बाम की अधिकतर इमारतें ध्वस्त हो गई हैं.

भूकंप

ईरान के दक्षिण-पूर्वी इलाक़े में भूकंप शुक्रवार को तड़के आया, जब अधिकतर लोग अपने घरों में सोए हुए थे.

ईरानी अधिकारियों के अनुसार रिक्टर पैमाने पर भूंकप की तीव्रता 6.3 थी. हालाँकि अमरीकी भूगर्भ विभाग इसे कहीं ज़्यादा 6.7 तीव्रता वाला बता रहा है.

सबसे ज़्यादा नुक़सान बाम शहर में देखने को मिला.

ऐतिहासिक बाम शहर यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है.

यह सोलहवीं और सत्रहवीं सदी में एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र रहा है.

नेस्तनाबूद हो चुके इस शहर और आसपास के इलाक़ों में कम से कम 25 हज़ार लोग मौत के मुँह में समा गए हैं.

बाम में केवल एक अस्पताल काम कर रहा है उसमें घायलों की भारी भीड़ जमा है.

अधिकारियों के मुताबिक़ 50 हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.