वाशिंग्टन और न्यूयॉर्क में 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद अमरीकी प्रशासन ने राष्ट्रव्यापी ख़तरा चेतावनी व्यवस्था को नया रूप देने का काम शुरू किया.
उन हमलों में तीन हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
ख़तरे की नई कलर-कोडेड चेतावनी की व्यवस्था मार्च 2002 में लागू की गई.
वर्षांत में इस्लामी चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के हमले की आशंका से आंतरिक सुरक्षा मंत्री टॉम रिज ने सतर्कता का स्तर 'पीला' से बढ़ा कर 'नारंगी' करने की घोषणा की.
अमरीकी आंतरिक सुरक्षा विभाग ने ख़तरे के स्तर के मद्देनज़र सतर्कता के पाँच विभिन्न स्तर निर्धारित किया है.
ख़तरे के बढ़ते स्तर के हिसाब से सतर्कता के स्तर को पाँच विभिन्न रंगों के कूट नाम दिए गए हैं- हरा, नीला, पीला, नारंगी और लाल.
सतर्कता के स्तर को ख़ुफ़िया रिपोर्टें के आधार पर या फिर किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के संदर्भ में तय किया जाता है.
बढ़े सतर्कता स्तर का मतलब है सरकारी भवनों, संवेदनशील प्रतिष्ठानों और स्कूलों आदि में सुरक्षा की बढ़ाई गई व्यवस्था.
बढ़ाए गए सतर्कता स्तर के दौरान जनता से भी ज़्यादा चौकस रहने को कहा जाता है.
वर्ष 2002 में सतर्कता के स्तर को एक बार नारंगी स्तर का किया गया, जबकि 2003 में चार बार.
अभी सर्वोच्च सतर्कता स्तर यानि लाल स्तर एक बार भी नहीं लागू किया गया है.