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मलेशिया अमरीकी रिपोर्ट पर नाराज़

मलेशिया के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बदावी ने अमरीका की उस रिपोर्ट पर गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की जिसमें मलेशिया में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित हनन का आलोचना की गई है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मलेशिया के वे मुसलमान परेशानियों का सामना करते हैं जो या तो कोई दूसरा धर्म अपनाना चाहते हैं या फिर सुन्नी मुसलमान नहीं हैं.

मलेशिया के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बदावी ने अमरीका से कहा है वह मलेशिया में विभिन्न मतों के लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता देखने के लिए ख़ुद अपने पर्यवेक्षक भेज सकता है.

लेकिन मलेशिया के विपक्षी नेताओं का कहना है कि ग़ैर मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जाता है.

असर नहीं

अमरीका का ब्यूरो ऑफ़ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स और लेबर नाम का सरकारी संगठन दुनिया भर में स्वतंत्रता की स्थिति का जायज़ा लेता है.

इस संगठन ने मलेशिया को ऐसे नौ देशों की सूची में रखा है जहाँ कुछ धार्मिक समूहों को ख़ास रियायतें दी जाती हैं और कुछ के साथ भेदभाव किया जाता है.

संगठन की रिपोर्ट में यह भी चिंता व्यक्त की गई है कि कुछ ग़ैर मुस्लिमों को अपने प्रार्थना स्थल बनाने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

लेकिन मलेशिया के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बदावी इस अमरीका आकलन से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हैं.

अब्दुल्ला ने अमरीकी सरकार से कहा है कि वह ख़ुद अपने पर्यवेक्षक भेजकर यह देख सकती है कि मलेशिया की मुस्लिम सरकार किस तरह सभी धर्मों के त्योहारों को मनाती है.

लेकिन मलेशिया के विपक्षी नेताओं का कहना है कि ग़ैर मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जाता है और उन्हें उँचे पदों से दूर रखा जाता है.

विपक्ष का कहना है कि मलेशिया में ग़ैर मुसलमानों की संख्या क़रीब 40 प्रतिशत है लेकिन पिछले तीस वर्षों में उन्हें कोई मंत्रि पद नहीं मिला है.