सद्दाम हुसैन पर इराक़ में ही मुकदमा चलाए जाने के लिए अमरीका पर दबाव बढ़ रहा है.
शनिवार रात को सद्दाम हुसैन की गिरफ़्तारी के बाद उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर बंदी बनाकर रखा गया है.
इराक़ की अंतरिम शासकीय परिषद के एक सदस्य अहमद चलाबी ने कहा है कि सद्दाम हुसैन पर उस विशेष न्यायलय में मुकदमा चलाया जाना चाहिए जो पिछले सप्ताह स्थापित किया गया है.
इस न्यायालय का गठन सद्दाम हुसैन के प्रशासन के प्रमुख नेताओं पर मुकदमा चलाने के लिए किया गया है.
अंतरिम शासकीय परिषद के अध्यक्ष अब्दल आज़ेज़ अल हाकिम ने भी मांग की है कि इराक़ में हाल में बनाए गए इस युद्धापराध न्यायालय में सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया जाए.
अमरीका ने अभी इसका जवाब नहीं दिया है.
शासकीय परिषद के सदस्यों की मुलकात सद्दाम हुसैन से करवाई गई है और उनका कहना है कि सद्दाम हुसैन को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि अमरीका के सामने सद्दाम हुसैन पर मुकदमा चलाने को लेकर एक और बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है.
मुकदमा कहाँ चलेगा?
आने वाले दिनों में पूरी दुनिया ये जानना चाहेगी कि सद्दाम हुसैन के साथ अमरीका कैसा बर्ताव करेगा? सद्दाम का दर्जा क्या होगा?
क्या उन्हें युद्ध बंदी मानकर जिनेवा संधि के तहत सुविधाएँ दी जाएँगी या अमरीका सब कुछ ख़ुद तय करेगा?
सवाल ये भी है कि क्या अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के हिसाब से सद्दाम हुसैन पर मुक़द्दमा चलेगा या फिर उन्हें इराक़ में अमरीका की स्थापित अंतरिम सरकार के हवाले किया जाएगा?
बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता जॉन लेएन के अनुसार अमरीका पहले ही कह चुका है कि जिन लोगों ने इराक़ियों पर अत्याचार किया उनके ख़िलाफ़ मुकदमा इराक़ी न्यायधीशों के सामने ही चलाया जाए.
लेकिन कई मानवाधिकार गुट इस सुझाव की यह कह कर आलोचना करते रहे हैं कि हाल के सालों शायद ही ऐसे कोई मुकदमें हों जो इराक़ी न्यायधीशों ने एक दो दिन के भीतर ही ना निपटाए हों.
उनका कहना है कि इन न्यायधीशों को लंबे और पेचीदा मुकदमे चलाने का अनुभव नहीं है.
जहां तक सद्दाम हुसैन का मामला है, शंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं कि शायद ही कोई अदालत उनके ख़िलाफ़ न्यायपूर्ण तरीके से मुकदमा चला सके.
ये बातें ऐसे विकल्प की ओर इशारा करती हैं कि एक इराकी खंडपीठ बने जिसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय क़ानून विशेषज्ञों की सलाह और सहायता दी जाए.
सद्दाम हुसैन का दर्जा
बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के संवाददाता डेविड लॉएन का कहना है कि पहले तो ये स्पष्ट होना चाहिए कि सद्दाम हुसैन का अब दर्जा क्या है और किस हैसियत से उन पर मुकदमा चलाया जाए?
क्या वो युद्ध बंदी हैं?
यदि ऐसा है तो फिर जिस प्रकार से सद्दाम हुसैन की गिरफ्तारी के बाद उनकी चिकित्सा जांच करते हुए विडियो टेप और तस्वीरें जारी की गईं, उन पर सवाल उठ सकते हैं?
ये युद्ध-बंदियों संबंधी अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है.
यदि सद्दाम हुसैन पर ऐसे क़ानून के तहत मुकदमा चलाया जाता है जिससे उन्हें मौत की सज़ा हो सकती हो तो ये यूरोपीय क़ानून ही नहीं बल्कि मौजूदा इराक़ी क़ानून के भी ख़िलाफ़ होगा.
और आख़िरी विकल्प है कि सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ अंतराष्ट्रीय अपराध न्यायलय में मुकदमा चले लेकिन ये भी मुश्किल है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को अमरीका ने मान्यता नहीं दी है.