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सद्दाम हुसैन की गिरफ़्तारी का असर

सद्दाम हुसैन की सत्ता पहले ही छिन्न भिन्न हो गई थी लेकिन उनकी गिरफ़्तारी इराक़ी, अमरीकी और ब्रिटेन की सेनाओं के लिए बेहद अहम है.

इसका मतलब है कि इराक़ में आख़िरकार सद्दाम के युग का अंत.

ये वो क्षण है जिसका गठबंधन सेनाओं को बहुत समय से इंतज़ार था.

इससे उन्हें इराक़ के पुनर्निर्माण के लिए नया विश्वास हासिल होगा.

दूसरी ओर इस गिरफ़्तारी से हमलावरों के हौसले पस्त होंगे.

ये दिलचस्प है कि इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने तुरंत सद्दाम समर्थकों से हथियार डालने की अपील की.

ये सोची समझी रणनीति है क्योंकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी ऐसी ही अपील की है.

अमरीकी और ब्रितानी सेनाओं का मानना है कि सद्दाम हुसैन का पकड़ा जाना गठबंधन कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है.

लेकिन अभी ये देखना बाक़ी है कि इराक़ी प्रतिरोध की कमर टूटती है कि नहीं.

लेकिन छापामार हमले कुछ समय के लिए तो जारी रह सकते हैं.

लेकिन गिरफ़्तारी से अमरीकी राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को ज़रूर स्थिति मज़बूत होगी.

लेकिन अब मुद्दा ये भी है कि सद्दाम हुसैन का क्या होगा.

इराक़ी शासकीय परिषद उन्हें और उनकी सत्ता से जुड़े अन्य लोगों को इराक़ी अदालत में मामला चलाना चाहती है.

इराक़ में मृत्युदंड की भी व्यवस्था है.

पिछले सप्ताह ही इराक़ी परिषद ने घोषणा की थी कि सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के गिरफ़्तार लोगों के खिलाफ़ विशेष अदालत में मुक़दमा चलाया जाएगा.

लेकिन कुछ मानवाधिकार ग्रुपों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में मामले चलाए जाने चाहिए.

हालांकि अभी मामले चलाने में थोड़ा समय है.

इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि सद्दाम हुसैन सत्ता से हटा दिए गए थे लेकिन उनका असर बना हुआ था.

उनके दोनों बेटे उदै और क़ुसै अमरीकी सैनिक कार्रवाई में मारे गए थे.

लेकिन आश्चर्यजनक बात ये है कि सद्दाम मारे नहीं गए बल्कि पकड़े गए.