अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कबायली सरदारों की परंपरागत महासभा लोया जिरगा के प्रतिनिधियों से नए संविधान पर अपनी जल्द सहमति देने की अपील की है.
लोया जिरगा की शुरुआत शनिवार से हो रही है.
हामिद करज़ई ने संविधान के मसौदे पर सहमत होने का अनुरोध किया है.
इसमें राष्ट्रपति को अनेक अधिकार दिए गए हैं.
उल्लेखनीय है कि अफ़ग़ानिस्तान में अगले साल पहले चुनाव होने हैं.
ख़बरों के अनुसार उन्होंने श्रीलंका का उदाहरण दिया जहाँ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री में मतभेद हैं और सत्ता का एक ही केंद्र बनाने का अनुरोध किया.
लेकिन अनेक प्रांतीय नेताओं का मानना है कि सत्ता बहुत केंद्रीयकृत है.
कुछ राष्ट्रपति की बजाए प्रधानमंत्री प्रणाली के पक्ष में हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति करज़ई को संविधान के मसौदे पर लोगों की सहमति के लिए कठिन प्रयास करने होंगे.
क्या है लोया जिरगा?
यह अफ़ग़ानिस्तान की एक अनूठी संस्था है जिसमें पख़्तून, ताजिक, हज़ारा और उज़्बेक कबायली नेता एक साथ बैठते हैं.
इसकी बैठक में देश के मामलों पर विचार विमर्श कर फ़ैसले किए जाते हैं.
लोया जिरगा पश्तो भाषा का शब्द है और इनका मतलब है महापरिषद.
सैकड़ों साल पुरानी यह संस्था इस्लामी शूरा या सलाहकार परिषद जैसे सिद्धांत पर ही काम करती है.
अब तक कबीलों के आपसी झगड़े सुलझाने, सामाजिक सुधारों पर विचार करने और नए संविधान को मंज़ूरी देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है.