नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में राष्ट्रमंडल सम्मेलन ज़िम्बाब्वे की सदस्यता के मामले पर चल रहे विवाद के बीच शुरू हुआ है.
सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी.
राष्ट्रमंडल में ज़िम्बाब्वे के दोबारा शामिल होने का मामला अब भी अनसुलझा है और विवादों के केंद्र में है.
कुछ अफ़्रीकी देश उसे सदस्यता दिए जाने के पक्ष में हैं.
लेकिन ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड सहित कुछ अन्य देशों का कहना है कि जब तक वहाँ लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार नज़र नहीं आता तब तक ऐसा नहीं किया जाना चाहिए.
राष्ट्रमंडल के महासचिव डॉन मैक्किनॉन का कहना है कि शिखर सम्मेलन से पहले की चर्चा में नेता इस बात पर सहमत थे कि इस विषय को सम्मेलन में हावी नहीं होने दिया जाएगा.
ज़िम्बाब्वे के समर्थक देशों में मॉरीशस भी शामिल है और वहाँ के विदेश मंत्री अनिल कुमारसिंह गायन ने बीबीसी से कहा कि ज़िम्बाब्वे को अलग-थलग रखने की प्रवृत्ति पर अब रोक लगनी चाहिए.
एक अन्य देश जिसे राष्ट्रमंडल में शामिल किए जाने पर बहस हो सकती है, वह है पाकिस्तान.
कई नेताओं का मानना है कि पाकिस्तान में सैन्य शासन से लोकतांत्रिक सरकार तक का सफ़र विवादों से अछूता नहीं है.
बीबीसी के बार्नेबी मेसन का कहना है कि इस बात की पूरी आशंका है कि विश्व व्यापार वार्ताएँ फिर शुरू करने, आतंकवाद का मुक़ाबला करने और छोटे देशों की विशिष्ट समस्याओं की अनदेखी हो जाएगी.