राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों ने पाकिस्तान की राष्ट्रमंडल की सदस्यता बहाल नहीं करने का फ़ैसला किया है.
जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के सत्ता में आने के बाद 1999 में पाकिस्तान को राष्ट्रमंडल से निलंबित कर दिया गया था.
पाकिस्तान के अलावा इस समय ज़िम्बाब्वे भी राष्ट्रमंडल से निलंबित है.
नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में चार दिवसीय राष्ट्रमंडल सम्मेलन के दौरान शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क ने प्रतिनिधियों को बताया कि जब तक पाकिस्तान लोकतांत्रिक और न्यायिक सुधारों की माँग नहीं मान लेता स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा.
उल्लेखनीय है कि कुछ पश्चिमी देश आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान के सहयोग को देखते हुए उसकी सदस्यता बहाल किए जाने के पक्ष में हैं.
लेकिन क्लार्क ने कहा कि जब तक मुशर्फ़ सेना के प्रमुख पद को छोड़ नहीं देते और लोकतांत्रिक एवं न्यायिक सुधारों की दिशा में और क़दम नहीं उठाते, पाकिस्तान की सदस्यता बहाल नहीं की जाएगी.
कनाडा के प्रधानमंत्री ज्याँ ख़ेतिएँ ने भी कहा कि पाकिस्तान का लोकतंत्र मुक़म्मल नहीं है, हालाँकि वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहा है.
भारत का विरोधी स्वर
इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुरुवार को कहा था भारत पाकिस्तान की राष्ट्रमंडल की सदस्यता बहाल किए जाने के ख़िलाफ़ है.
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में वाजपेयी के अलावा विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र शामिल हैं.
सिन्हा ने वहाँ बीबीसी को बताया कि सितंबर में राष्ट्रमंडल की मंत्रीस्तरीय कार्यदल की बैठक में पाकिस्तान की सदस्यता बहाल नहीं करने का फ़ैसला किया गया था और गुरुवार को कार्यदल की बैठक में पाया गया कि उसके बाद से पाकिस्तान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.
उम्मीद
इससे पहले पाकिस्तान ने उम्मीद व्यक्त की थी कि अबुजा सम्मेलन में उसकी सदस्यता बहाल किए जाने के पक्ष में कोई क़दम उठाया जा सकता है.
पाकिस्तानी विदेश विभाग के प्रवक्ता मसूद ख़ान ने शुक्रवार को कहा, "हमें राष्ट्रमंडल महासचिव डॉन मैक्किनॉन ने आश्वस्त किया है. उन्होंने स्वीकार किया कि हमारी संसद में समाज के सभी तबके का प्रतिनिधित्व है."
इस बीच भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा है कि पाकिस्तान को न सिर्फ सीमा पार से घुसपैठ पर रोक लगानी चाहिए बल्कि अपने यहाँ चरमपंथियों की गतिविधियाँ भी बंद करनी चाहिए.
वाजपेयी ने अबुजा में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड से बातचीत में यह बात कही.
बातचीत की जानकारी देते हुए सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि वाजपेयी ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी के साथ शांति प्रक्रिया जारी रखना चाहता है.