तुर्की में इस्तांबुल में यहूदियों के दो उपासना स्थलों के पास हुए कार बम विस्फोटों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है, जबकि 150 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.
तुर्की के एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन आईबीडीए-सी(ग्रेट ईस्टर्न इस्लामिक रेडर्स फ़्रंट) ने दोनों विस्फोटों की ज़िम्मेदारी ली है.
यहाँ के विदेश मंत्री अब्दुल्ला गुल ने कहा है कि उन्हें लगता है कि इस हमले के पीछे आत्मघाती हमलावरों का हाथ हो सकता है.
उन्होंने इसे एक आतंकवादी कृत्य बताया जिसके तार बाहरी देशों से जुड़े हुए हैं.
हालाँकि पुलिस विस्फोटों में अल-क़ायदा संगठन का हाथ होने की संभावना की भी जाँच कर रही है.
संख्या
तुर्की सरकार ने विस्फोट में मरने वालों की संख्या 16 बताई है, लेकिन पुलिस मृतकों की संख्या और ज़्यादा बता रही है.
पहला विस्फोट इस्तांबुल में यहूदियों के सबसे बड़े उपासना गृह नेवे शैलोम के पास हुआ. उस समय वहाँ श्रद्धालु प्रार्थना कर रहे थे.
उपासना गृह की इमारत का अगला हिस्सा धमाके में ध्वस्त हो गया.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट स्थल के पास चारों ओर शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे.
चिकित्सा सहायता दल ख़ून से लथपथ लोगों को ले जा रहे थे.
पहले भी हुए हैं हमले
उल्लेखनीय है कि 1986 में भी इस नेवे शैलोम को एक हमले का निशाना बनाया गया था, जब फ़लस्तीनी बंदूकधारियों की गोलीबारी में 22 लोग मारे गए थे.
नेवे शैलोम के विस्फोट के कुछ ही मिनट बाद तीन किलोमीटर दूर यहूदियों के एक अन्य उपासना गृह के पास एक विस्फोट हुआ.
हमले में बेथ इसराइल नामक उपासना गृह की इमारत को नुक़सान पहुँचा.
इससे पहले भी इस्तांबुल में इस्लामी चरमपंथियों और कुर्द कट्टरपंथियों के हमले हुए हैं.