भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार बॉबी जिंदल अमरीका के लुइसियाना राज्य में गवर्नर के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कैथलीन ब्लैंको को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
गवर्नर पद का चुनाव 15 नवंबर को होना है.
इस चुनाव में मुख्य मुद्दा नौकरियों में कमी, स्वास्थ्य सेवाओं और चुनाव प्रणाली में सुधार है.
मुक़ाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है और बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने मतदाता मतदान के लिए आते हैं.
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार पियूष बॉबी जिंदल ने अमरीका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को राजनीतिक मंच पर ला खड़ा किया है.
हालांकि लुइसियाना पारंपरिक रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ माना जाता है.
यदि बॉबी जिंदल चुनाव जीत जाते हैं, तो वो लुइसियाना के पहले ग़ैर श्वेत गवर्नर बन कर एक इतिहास बनाएँगे.
बॉबी जिंदल के ख़िलाफ़ विरोधी टीवी विज्ञापनों के ज़रिए अभियान छेड़े हुए हैं.
बॉबी अपने समर्थकों की रैली में कहते हैं,"पुरानी घिसी-पिटी राजनीतिक बातें कही जा रहे हैं. ये वही लोग कह रहे हैं जो सत्ता पर कब्ज़ा रखना बनाए रखना चाहते हैं.
वो कहते हैं," टीवी पर ध्यान न दें, किसी की न सुनें. आपको पता नहीं क्या बकवास सुनाई दे."
32 वर्षीय जिंदल पंजाब के एक हिंदू परिवार से हैं.
उनके माता-पिता जालंधर से लुइसियाना आए थे.
उपलब्धियाँ
उनकी उम्र के लिहाज़ से बॉबी जिंदल की उपलब्धियाँ कहीं अधिक हैं.
बॉबी जिंदल की उपलब्धियों से लोग प्रभावित हैं
जब वो लगभग 20 वर्ष के थे तो वो लुइसियाना राज्य के स्वास्थ्य सचिव बना दिए गए थे.
इसके अलावा वे लुइसियाना विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे है.
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का ध्यान उनकी ओर गया और उन्होंने बॉबी जिंदल को स्वास्थ्य सेवाओं का सलाहकार नियुक्त कर दिया.
बुश प्रशासन में काम करने वाले वे अब तक के सबसे युवा भारतीय मूल के व्यक्ति हैं.
ऐसा लग रहा है कि लुइसियाना के लोग राजनेताओं की अक्षमता से परेशान हैं और यही वजह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ लोग बॉबी जिंदल से आ मिले.
बॉबी जिंदल की बातें गोरे मतदाताओं वाले लुइसियाना राज्य में गंभीरता से सुनी जा रही हैं.
यही वजह है कि वे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी से आगे चल रहे हैं.
जब बॉबी जिंदल ने स्वास्थ्य विभाग संभाला था तो उस समय वो 40 करोड़ डॉलर के घाटे में चल रहा था.
लेकिन वो इस विभाग से अलग हुए तो इस विभाग के पास एक अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि थी.
लेकिन बॉबी जिंदल के विरोधी इससे सहमत नहीं हैं.
उनका कहना है कि ये अतिरिक्त राशि राज्य में अस्पतालों को सहायता राशि में कटौती से हासिल हुई थी.
चुनावी गणित
अमरीका के इस दक्षिणी राज्य में चुनावी गणित अलग तरह का है.
इस क्षेत्र में गोरे और काले लोगों की बहुतायत है.
अफ़्रीकी मूल के अमरीकी पारंपरिक रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी को समर्थन देते आए हैं.
ऐसा माना जा रहा है कि इस चुनाव में भी बॉबी जिंदल के समर्थन में 5 से 10 प्रतिशत काले लोग ही वोट डालेंगे.
बॉबी जिंदल के प्रचार प्रमुख ट्रे विलियम्स का कहना है, हम किसी ख़ास ग्रुप को लक्ष्य नहीं बना रहे हैं.जिंदल पूरे राज्य के लोगों का वोट चाहते हैं.
उनका कहना था, पारंपरिक रूप से हमें कभी काले लोगों का वोट नहीं मिला. लेकिन इस बार हमें उम्मीद है कि वे हमें वोट डालेंगे क्योंकि बॉबी ने उन तक पहुँचने की कोशिश की है.
लगता है कि बॉबी जिंदल खेमे के लोग काले लोगों के वोटों पर ज़्यादा निर्भर नहीं हैं.
वे पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन समर्थकों के वोटों पर निर्भर है.
अमरीका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को इस बात को लेकर बड़ी उम्मीद है कि उनमें से एक व्यक्ति गवर्नर बन सकेगा.
लेकिन उनमें से कुछ लोग उनके धर्म के चुनाव को लेकर सहमत नहीं हैं.
बॉबी जिंदल जब स्कूल में थे तो उन्होंने कैथोलिक ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था.