संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए ने अपनी एक गुप्त रिपोर्ट में कहा है कि ईरान अभी भी अपने परमाणु कार्यक्रमों के बारे में पूरी जानकारी देने में नाकाम रहा है.
लेकिन संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले महीने से ईरान ने उसके साथ बेहतर सहयोग करना शुरू किया है.
दूसरी ओर ईरान का कहना है कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर अस्थायी तौर पर रोक लगा रहा है और संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र भेज रहा है जिसमें 'तथाकथित' अतिरिक्त समझौते पर सहमति ज़ाहिर की गई है.
समझौते में ईरान के परमाणु संयंत्रों के बारीकी से निरीक्षण का प्रावधान है जिसके बारे में अमरीका का कहना है कि उनका इस्तेमाल परमाणु हथियार विकसित करने के लिए किया जाता है.
कूटनीतिज्ञों का कहना है कि आईएईए की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने यूरेनियम और प्लूटोनियम संवर्धित पदार्थों का कुछ मात्रा में उत्पादन किया है जिसका परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल हो सकता है.
लेकिन एजेंसी का यह भी कहना है कि इसके कोई संकेत नहीं मिले हैं कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है.
एजेंसी ने यह चेतावनी दी है कि उसे पक्के तौर पर यह कहने में समय लगेगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
अस्थायी रोक
ईरान की सुप्रीम नेशनल सेक्योरिटी काउंसिल के सचिव हसन रूहानी ने मॉस्को में अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर अस्थायी तौर पर रोक की घोषणा की.
संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु संयंत्रों में ईंधन के तौर पर किया जाता है लेकिन उसे हथियार बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
इतर तास एजेंसी ने हसन रूहानी को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात से पहले इस बात पर ज़ोर देते बताया है कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल करने का प्रयास नहीं कर रहा है.
लेकिन उन्होंने कहा कि ईरान ने सभी आशंकाओं और चिंताओं को दूर करने का फ़ैसला किया है.
उनका कहना था कि ईरान अपने भावी परमाणु कार्यक्रम अतंरराष्ट्रीय नियमों के ढांचे के तहत जारी रखेगा.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अमरीका का मानना है कि ईरान को यूरेनियम के संवर्धन का अधिकार है लेकिन ईरान के इस बयान पर ख़ुशी है कि वह स्वंय पर सीमा लगाने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने यह भी कहा कि इस घोषणा के बाद रूस को ईरान के साथ परमाणु सहयोग जारी न रखने की कोई वजह समझ में नहीं आती.
रूस ने बार-बार दक्षिण-पश्चिमी बुशेहर में अस्सी करोड़ डॉलर की लागत से बनने वाले उस परमाणु रियैक्टर के निर्माण की योजना टाली है जो वह ईरान के सहयोग से लगाने वाला था.