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बुश प्रशासन इराक़ी परिषद से तंग

अमरीकी से कुछ ऐसी ख़बरें मिल रही हैं कि बुश प्रशासन इराक़ की अंतरिम शासकीय परिषद से तंग आ चुका है और उससे छुटकारा पाने और देश में स्वशासन की स्थापना के लिए कोई और विकल्प तलाश रहा है.

वाशिंगटन पोस्ट अख़बार ने एक अमरीकी अधिकारी के हवाले से ख़बर दी है कि बुश प्रशासन महत्वपूर्ण फ़ैसले लेने में परिषद की नाकामी से ख़ासा परेशान है.

वाशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड बैमफ़ोर्ड का कहना है कि वाशिंगटन पोस्ट ने बुश प्रशासन के इस अधिकारी को वरिष्ठ क़रार दिया है.

इस अधिकारी ने अख़बार को बताया है कि बुश प्रसासन इराक़ी अंतरिम परिषद के बारे में अब अपना धैर्य तेज़ी से खोता जा रहा है.

ढाँचा

ग़ौरतलब है कि इराक़ी अंतरिश शासकीय परिषद में शिया, सुन्नी और कुर्द समुदायों को लोग हैं लेकिन सभी सदस्यों को अमरीकी प्रशासन ने ही चुना था.

गठन के समय ही यह संदेह था कि क्या वे सदस्य कोई प्रतिनिधिक हैसियत भी रखते हैं या सिर्फ़ अपनी निजी राय आगे बढ़ाएंगे.

जिस समय इस परिषद का गठन किया गया था तब सोचा गया था कि इराक़ में चुनी हुई सरकार के गठन का रास्ता जल्दी ही तय हो जाएगा और कुछ ही महीनों में नई सरकार बन जाएगी.

अख़बार का कहना है कि बुश प्रशासन परिषद के सदस्यों से ख़ासतौर से इसलिए परेशान है कि वे अपनी निजी राय आगे बढ़ाते हैं इसलिए परिषद कोई सामूहिक फ़ैसला लेने में नाकाम रहती है.

लेकिन अमरीकी रक्षा मंत्रालय में एक कट्टर माने जाने वाले सलाहकार रिचर्ड पर्ले ने एक इंटरव्यू में कहा है कि वह परिषद में किसी फेरबदल के ख़िलाफ़ हैं.

लेकिन सीनेटर जो बाइडेन सोचते हैं कि परिषद के ढाँचे पर फिर से नज़र डालने से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की स्थिति में बदलाव हो सकता है.

वाशिंगटन पोस्ट ने अधिकारियों के हवाले से जो लिखा है उससे यह संकेत मिलता है कि इराक़ में भी अफ़ग़ानिस्तान की ही तरह एक अंतरिम लेकिन संप्रभु सरकार बना दी जाए.

उसकी ख़ास बात ये है कि फ्राँस जैसे देश भी उसी तरह की सरकार का समर्थन कर रहे हैं.