पेंशन लेने के लिए अपने जीवित होने का प्रमाणपत्र देने का नियम बनाने के लिए ब्राज़ील सरकार ने अपने देश के बुज़ुर्गों से माफ़ी माँगी है.
सरकार ने यह नियम पिछले हफ़्ते लागू किया था ताकि धोखाधड़ी को रोका जा सके.
यह नियम 90 साल से अघिक उम्र के सभी बुज़ुर्गों पर लागू होना था.
सरकार का कहना है कि पेंशन के एक तिहाई मामलों मे धोखाधड़ी हो रही है और युवा लोग अपने ऐसे रिश्तेदारों के नाम पर पेंशन ले रहे हैं जिनकी मौत हो चुकी है.
लेकिन इस नियम के लागू होने के बाद सामाजिक सुरक्षा कार्यालय के बाहर जिस तरह की कतार लग गई और बुज़ुर्गों को जिस तरह की परेशानी हुई उसके चलते सरकार को माफ़ी माँगनी पड़ी है.
लाख से अधिक लोग
दरअसल ब्राज़ील सरकार एक निश्चित उम्र के बाद देश के सभी बुज़ुर्ग नागरिकों को पेंशन देती है.
इस समय देश में 90 साल से अधिक उम्र वाले एक लाख से अधिक लोग हैं.
बीबीसी संवाददाता स्टीव किंगस्टोन का कहना है कि इस नियम की भावना तो अच्छी थी लेकिन यह बुरी तरह विफल हुई है.
सरकार चाहती थी कि 90 साल से अधिक उम्र के सभी बुज़ुर्ग समाजिक सुरक्षा कार्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन करा लें जिससे कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके.
लेकिन जैसे ही इस नियम की घोषणा हुई, सामाजिक सुरक्षा कार्यालय के सामने बुज़ुर्गों की कतार लगनी शुरु हो गई.
लोग अपने हाथों में दस्तावेज़ों लिए हुए थे और उनको कागज़ी कार्रवाई पूरी करने के लिए खड़ा रहना पड़ा.
ब्राज़ील के विपक्षी दलों ने इसे अमानवीय और क्रूर बताते हुए इसका ज़ोरदार विरोध किया.
और सरकार में इसे लेकर ऐसा हड़कंप मचा कि पेंशन मामलों के मंत्री को टेलीविजन पर आकर बुज़ुर्गों से माफ़ी माँगनी पड़ी.
मंत्री रिकार्डो बारज़ोइनी ने कहा कि इस परेशानी के लिए पूरी ज़िम्मेदारी ले रहे हैं.
हालांकि सरकार ने इस नियम को वापस नहीं लिया है लेकिन कहा गया है कि अब ज़्यादातर कागज़ी कार्रवाई उनके घर पर जाकर ही की जाएगी.