फ़ातिमा मौलूद अन्य मुस्लिम औरतों की तरह पश्चिमी सहारा के रेगिस्तानी इलाक़े में रहनेवाली एक महिला हैं.
मगर दूसरी जगहों की मुस्लिम औरतों से अलग फ़ातिमा दो बार तलाक़ ले चुकी हैं और अब अपने तीसरे पति के साथ रह रही हैं.
ऐसा नहीं है कि फ़ातिमा तलाक़ लेनेवाली ऐसी महिलाओं में सबसे आगे हैं.
नज़र दौड़ाई जाए तो यहाँ ऐसी महिलाएँ भी मिल जाती हैं जिनका आठ-आठ बार तलाक़ हुआ और उन्होंने शादियाँ कीं.
आमतौर पर मुस्लिम जगत में तलाक़शुदा महिलाओं को समाज में तुच्छ निगाह से देखा जाता है.
मगर सहारा में ऐसा नहीं है. यहाँ तलाक़शुदा महिलाओं की बड़ी इज़्ज़त है और उन्हें कुँआरी लड़कियों से ज़्यादा आकर्षक समझा जाता है.
अनुभवी बीवी
फ़ातिमा के बारे में बात करते समय उनके पति मोहम्मद थोड़ा मुस्कुराते भी हैं और थोड़ा शर्माते भी.
कहते हैं,"देखिए एक अनुभवी औरत उस औरत से बेहतर है जिसे ये सिखाना पड़े कि मर्द के साथ संबंध कैसे बनाकर रखा जाए".
मोहम्मद का कहना है कि मर्द के साथ संबंध बनाने में उस औरत का दर्जा उन औरतों की जगह काफ़ी ऊँचा है जो ऐसे संबंधों में पहला क़दम रख रही हो.
तलाक़ आम बात
फ़ातिमा बताती हैं कि तलाक़ को सहारा में बुरी नज़र से नहीं देखा जाता.
वे कहती हैं,"पति-पत्नी ये मान लेते हैं कि रिश्ते को खींचने का फ़ायदा नहीं और पति चला जाता है. कोई झंझट नहीं होती और ना ही शर्म की कोई बात होती है".
फिर तलाक़ के तीन हफ़्ते बीतते ही औरत अपने फिर से 'अविवाहित' होने का जश्न मनाती है.
मगर ये 'अविवाहित' जीवन ज़्यादा लंबा नहीं चलता.
अक्सर जश्न में उसकी मुलाक़ात उस मर्द से हो जाती है जो उसका अगला जीवनसाथी होगा.
फ़ातिमा बताती हैं कि ये सहारा के लिए कोई नई जीवन-शैली नहीं है.
उनका कहना है कि ऐसा उनकी बरसों पुरानी ख़ानाबदोश ज़िंदगी के कारण हुआ है जहाँ पति चला जाया करता था और औरतों को अपने तंबूओं की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ती थी.
मतभेद
सहारा की औरतों की इस शादी की आज़ादी के कारण ही मोरक्को की संस्कृति से उनकी नहीं पटती.
ये एक महत्वपूर्ण कारण है जिसके लिए वे अलग स्वतंत्र पश्चिमी सहारा नामक देश की माँग करती हैं.
फ़ातिमा कहती हैं,"मोरक्को की महिलाओं से हमारी ज़िंदगी बिल्कुल अलग है. वे अपने बच्चों की शिक्षा या उनके पालन से उस तरह नहीं जुड़ी होतीं जिस तरह हम जुड़े होते हैं".
उन्होंने बताया कि मोरक्को में महिलाओं पर काफ़ी दबाव होता है और चूँकि वे राजनीति में भाग नहीं लेतीं इसलिए समाज में उनकी कोई बड़ी भूमिका नहीं है.
राजनीति में भागीदारी
सहारा में महिलाएँ राजनीतिक संघर्ष में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती हैं.
फ़ातिमा ख़ुद पोलिसारियो फ़्रंट में एक पार्षद हैं.
उन्होंने बताया कि उन्होंने इसके पहले अन्य महिला राजनेताओं के साथ मिलकर एक संगठन बनाया था ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके.
फ़ातिमा का कहना था,"कुछ मर्द राजनेताओं से हमारी कई मुद्दों पर नहीं पटती थी क्योंकि वे हमारे यहाँ शासन करनेवाले पुराने स्पेनी शासकों की सोच के थे".
लेकिन उनका कहना है कि महिलाएँ भी मंत्री या राजदूत बनने की क्षमता रखती हैं और इसलिए वे सहारा संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगी.
पश्चिमी सहारा
स्पेन ने 1884 में पश्चिमी सहारा को अपना उपनिवेश बना लिया था.
1965 में संयुक्त राष्ट्र ने स्पेन को इस क्षेत्र से हटने को कहा.
1975 में पड़ोसी देश मोरक्को के शाह ने अपने साढ़े तीन लाख लोगों को इस क्षेत्र में जाने को कहा जिसके बाद स्पेन पश्चिमी सहारा को मोरक्को और मौरिटानिया को देने को राज़ी हो गया.
1976 में स्पेन यहाँ से हटा जिसके बाद पोलिसारियो फ़ाउंडेशन के छापामारों के साथ लड़ाई शुरू हो गई
1976 में लगभग दो-तिहाई हिस्से पर मोरक्को ने क़ब्ज़ा कर लिया था और फिर 1979 में मौरिटानिया के हिस्से वाली भूमि को भी मिला लिया.
मगर पोलिसारियो फ़्रंट ने इसके ख़िलाफ़ छापामार लड़ाई जारी रखी जिसके बाद 1991 में यहाँ संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप से संघर्षविराम हुआ.
इसके बाद पश्चिमी सहारा की स्थिति तय करने के लिए यहाँ संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह की बात तय हुई मगर इसे बार-बार टाला गया है.