मलेशिया के प्रधानमंत्री डॉक्टर महातिर मोहम्मद 22 साल बाद शुक्रवार को सत्ता छोड़ रहे हैं.
उन्होंने गुरुवार को आख़िरी बार संसद को संबोधित किया है.
अपने अंतिम भाषण में महातिर मोहम्मद ने अपने नेतृत्व के दौरान की दो बातों पर ज़ोर दिया.
उन्होंने एक तो अर्थव्यवस्था और दूसरे लोकतंत्र के साथ उनके 'असहज रिश्तों' की बात उठाई.
उनके शासनकाल के दैरान मलेशिया की अर्थव्यवस्था का तेज़ी से विकास हुआ.
लेकिन उन पर नागरिक स्वतंत्रता में कमी का दोषी ठहराया जाता है.
उन्होंने संसद में कहा कि कभी कभी असली लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्होंने कुछ लोगों के साथ 'अलोकतांत्रिक' व्यवहार किया.
उनके विरोधियों का कहना है कि उन्होंने अपने शासनकाल में 'बहुमत की निरंकुशता' स्थापित कर दी थी.
विवादस्पद बयान
एक बार फिर उन्होंने अपनी विवादास्पद वक्तव्य दोहराया कि दुनिया पर यहूदियों का राज है.
उन्होंने कहा कि वे छद्म तरीक़े से दुनिया पर शासन कर रहे हैं.
अमरीकी सीनेट ने मलेशिया को दी जाने वाली सैनिक सहायता को धार्मिक स्वतंत्रता ख़ासकर यहूदियों के प्रति सहिष्णुता से जोड़ दिया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना था कि डॉक्टर महातिर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कट्टर राष्ट्रवादी नेता के रूप में की थी.
शुरुआत में उन्होंने ऐसी नीतियों का समर्थन किया जो देश के चीनी और भारतीय मूल के लोगों से भेदभाव करती थीं और देश के मूल मलय लोगों के पक्ष में थीं.
लेकिन अब 22 साल सत्ता में रहने के बाद जब वो सत्ता से हट रहे हैं तो अनेक चीनी और भारतीय मूल के लोगों का कहना है कि वे सत्ता में बने रहते तो बेहतर होता.
दूसरी ओर अनेक मलय लोग उन पर मुस्लिम सिद्धांतों को त्यागने का आरोप लगाते हैं.
महातिर मोहम्मद एक ग्रामीण इलाक़े से निकले डॉक्टर हैं.
राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ जोहान सरवनमुत्तू का कहना है कि शायद उनकी पृष्ठभूमि के कारण उन्हें राजनीतिक एजेंडा तैयार करने में मदद मिली.