संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख शांतिरक्षक अधिकारियों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध के बाद बनी सरकार की कमज़ोरी की वजह से तालेबान फिर सक्रिय होते नज़र आ रहे हैं.
सुरक्षा परिषद को अपनी नियमित जानकारी में शांतिरक्षक अभियान के उप महासचिव ज्याँ मारी गुहेनो ने कहा कि अब भी असुरक्षा से जुड़े कई मामले अनसुलझे हैं.
उनका कहना था, कई सीमावर्ती इलाक़ों में तालेबान ज़िला प्रशासन पर अपना अप्रत्यक्ष नियंत्रण बढ़ाते जा रहे हैं.
जर्मनी ने उत्तरी नगर कुंदूज़ के आसपास अपने साढ़े चार सौ सैनिकों की तैनाती पर सहमति ज़ाहिर कर दी है.
यह वह इलाक़ा है जहाँ राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने शुक्रवार को निरस्त्रीकरण और लोगों को संगठित करने के अभियान की शुरुआत की थी.
लेकिन वैसे अभी तक अन्य देशों ने सुरक्षा परिषद के नेतृत्व में काबुल के बाहर तैनात किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बल के लिए ही सैनिक भेजे जाने की बात की है.
गुहेनो ने कहा, "यह एक चिंताजनक संकेत है कि सरकार में सदस्यों के मतभेदों के बावजूद जो एक राजनीतिक एकजुटता क़ायम हो गई थी वह कमज़ोर होती नज़र आ रही है".
असुरक्षा की भावना
उन्होंने कहा कि असुरक्षा की भावना पुनर्निर्माण के काम को धीमा कर रही है.
अफ़ग़ान सरकार अगले दो साल में एक लाख विद्रोहियों को निहत्था करने का इरादा रखती है.
अनुमान है कि देश भर में इस तरह के चार लाख लोग मौजूद हैं.
लेकिन इस बारे में अब भी संदेह है कि अफ़ग़ानिस्तान के क़बायली नेता इसमें कितनी मदद करेंगे.