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मदद के वायदों का स्वागत किया

इराक़ के अधिकारियों ने देश के पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाने के मामले पर मैड्रिड में हुई बैठक में जो वायदे किए गए हैं उन पर संतोष ज़ाहिर किया है.

सम्मेलन में जापान और यूरोपीय संघ ने आर्थिक मदद का वादा किया है.

कुल मिलाकर इराक़ को 13 अरब डॉलर देने की बात कही गई है.

अमरीका पहले ही 20 अरब डॉलर देने का वादा कर चुका है लेकिन इराक़ को पुनर्निर्माण के लिए कुल 56 अरब डॉलर का ख़र्च आँका गया है.

इस तरह अब भी 33 अरब डॉलर की कमी पड़ रही है.

जापान की सरकार ने कुल पाँच अरब डॉलर देने की घोषणा की है.

कुवैत ने 50 करोड़ डॉलर देने की बात कही है जबकि सऊदी अरब भी ऋण के रूप में 50 करोड़ और निर्यात ऋण के रूप में 50 करोड़ डॉलर देगा.

यूरोपीय संघ की ओर से 81 करोड़ 20 लाख डॉलर देने की बात कही गई है जबकि यूरोपीय संघ का अध्यक्ष इटली लगभग 23 करोड़ डॉलर देगा.

विश्व बैंक की ओर से तीन से पाँच अरब डॉलर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से अगले तीन वर्षों में लगभग साढ़े चार अरब डॉलर दिए जाने हैं.

जापान में विरोध

लेकिन जापान में कई लोगों ने इस मदद का ये कहते हुए विरोध किया है कि जापान ख़ुद ही आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रहा है.

ये आधिकाँश आर्थिक मदद अगले चार साल में कम व्याज वाले छोटे-छोटे ऋणों के रूप में दी जाएगी.

लेकिन जापान के संविधान को ध्यान में रखते हुए उनके लिए वहाँ कोई ऐसी भूमिका तालाश की जा रही हैं जिसमें उन्हें लड़ाई या उससे संबंधित काम न करना पड़े.

जापान अमरीका की इराक़ नीति का समर्थक रहा है और उम्मीद की जा रही थी कि वह इराक़ के पुनर्निर्माण में धनराशि देने के लिए उदारता से आगे आएगा.

पिछले खाड़ी युद्ध के बाद इराक़ के पुनर्निर्माण के लिए जापान ने 14 अरब डॉलर दिए थे.

जापान में जो लोग जापान की इस प्रस्तावित मदद का विरोध कर रहे हैं उनका तर्क है कि आर्थिक मंदी के चलते ये पैसा जापान में ही कई जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता था.

जापानी सैनिकों को विदेश में तैनात करने पर तो और भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

जापान की सरकार अगले महीने होने वाले आम चुनावों का इंतज़ार कर रही है ताकि इराक़ में जापानी सैनिकों की भूमिका, संख्या और तैनाती पर फ़ैसला किया जा सक.