पिछले शुक्रवार को दुनिया की सबसे ऊँची इमारत के ताइवान में होने का दावा किया गया.
शुक्रवार को पूरी हुई इस इमारत का नाम ताइपेई-101 है और ये 508 मीटर यानी 1,676 फुट ऊँची है.
मगर अब इस दावे पर उंगलियाँ उठने लगी हैं.
पिछले छह वर्षों से मलेशिया की 'पैट्रोनास टॉवर्स' को दुनिया की सबसे ऊँची इमारत कहा जाता था.
ताइवान की नई इमारत कुआलालंपुर की ट्विन टावर्स से पचास मीटर ऊँची है.
सवाल
मलेशिया में दुनिया की ऊंची इमारतों के संगठन के अध्यक्ष ने कहा है कि ये दावा अभी करना सही नहीं है.
उन्होंने कहा कि ये दावा करने से पहले इस इमारत के सबसे ऊँची होने के बारे में इमारतों के मापदंडों को पूरा नहीं करती.
उन्होंने कहा कि इसके लिए ये ज़रूरी है कि पहले इस बिल्डिंग में कामकाज शुरू हो जाए.
ताइपेई-101
91 मंज़िलों वाली इस इमारत राजधानी ताइपेई के व्यावसायिक इलाक़े में खड़ा किया गया है.
इसकी औपचारिक शुरुआत अगले साल होगी.
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि ताइपेई-101 नाम की इस इमारत के पास दुनिया की सबसे ऊँची इमारत होने का ख़िताब बहुत लंबे समय तक नहीं रहेगा.
दरअसल चीन में बन रही 'शंघाई वर्ल्ड फ़ाइनेंशियल सेंटर' दुनिया का सबसे ऊँची इमारत हो जाएगी, जो 2007 तक पूरी हो जाएगी.
भूकंपरोधी
इस इमारत में ऑफ़िस, दुकानें और मनोरंजन केंद्र आदि होंगे.
यह इमारत का कितनी तेज़ी से पूरा हुआ है इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हर छह दिन में इसकी एक नई मंज़िल तैयार कर ली गई.
इस इमारत में दुनिया की सबसे तेज़ लिफ़्ट होगी और साथ ही सबसे ऊपरी मंज़िल तक सीढ़ियाँ भी हैं.
कुछ लोगों ने चिंता जताई थी कि ताईवान में भूकंप की बड़ी आशंका है और वहाँ ऐसी इमारत बनाना ख़तरनाक हो सकता है.
पिछले साल जब वहाँ भूकंप आया तो निर्माणाधीन इमारत के ऊपर से क्रेन नीचे गिर गया था और पाँच लोगों की मौत हुई थी.
लेकिन इस भव्य इमारत के निर्माताओं का कहना है कि यह इमारत ख़तरे वाली जगह पर नहीं है और फिर यह हर तरह के भूकंप को सह सकती है.
इसकी नींव ज़मीन के भीतर 80 मीटर तक है.
यह भी कहा जा रहा है कि शायद यह इमारत खाली ही रह जाएगी क्योंकि ताइपेई में इतने ऑफ़िसों के लिए जगह की ज़रुरत ही नहीं है.