संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने पश्चिमी देशों और मुस्लिम दुनिया के बीच बढ़ते तनाव को 'कुरूप, ख़तरनाक और ग़लत' बताया है.
साथ ही उन्होंने 'आतंक' का रास्ता न अपनाने की सलाह भी दी है.
मलेशिया में हो रहे मुस्लिम देशों के सम्मेलन में अन्नान ख़ुद नहीं जा पाए लेकिन वहाँ उनका भाषण पढ़ा गया.
दरअसल वे इराक़, गज़ा और पश्चिमी तट के मामलों को सुलझाने में लगे हुए हैं.
लेकिन उन्होंने मलेशिया में जमा हुए 57 देशों के लिए अपना संदेश ज़रूर भेजा है.
फ़लस्तीन में इसराइली कब्ज़े की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि इसराइल में जो आत्मघाती हमले किए जा रहे हैं वह 'आतंक की कार्रवाई' है और इससे फ़लस्तीनी राष्ट्र की माँग पर असर पड़ सकता है.
कोफ़ी अन्नान का कहना था कि सभी धार्मिक आस्थाओं के चरमपंथी लोग ताक़तवर होते जा रहे हैं और दुनिया को उनको रोकना चाहिए.
उन्होंने कहा कि मुस्लिम ज़्यादा महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं और वे इस तथ्य से वाकिफ़ भी हैं.
उनका कहना है कि यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि मुस्लिमों के पास उनके मूलभूत अधिकार हों.
इससे पहले सम्मेलन के अध्यक्ष और मेज़बान डॉ महातिर मोहम्मद ने कहा कि उनकी राय में दुनिया पर "गुप्त रुप से यहूदियों का ही राज है."
हालांकि उनके भाषण में शिक्षा और मुसलमानों के बीच एकता को बढ़ावा देने पर ही ज़ोर था.
डॉ महातिर ने कहा कि यहूदियों ने अपनी तरक्की के लिए लोकतंत्र, समाजवाद और मानवाधिकार को बढ़ाया है.