ऑस्ट्रेलियाई लेखक डीबीसी पियर को इस वर्ष साहित्य जगत का प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार दिया गया है.
उन्हें ये पुरस्कार उनके पहले उपन्यास वर्नन गॉड लिटल के लिए दिया गया है.
वे बुकर पुरस्कार जीतनेवाले तीसरे ऑस्ट्रेलियाई लेखक हैं.
वर्नन गॉड लिटल टेक्सास में एक हाई स्कूल में हुए नरसंहार के बारे में लिखा गया उपन्यास है.
42 वर्षीय पियर का असली नाम पीटर फ़िन्ले है मगर वे डीबीसी पियर के उपनाम से लिखते हैं जिसका मतलब है डर्टी बट क्लीन.
पियर को बुकर पुरस्कार के लिए 50 हज़ार पाउंड मिले हैं.
जीवंत उपन्यास
निर्णायकों ने इस उपन्यास को काले लोगों के बारे में लिखा गया एक चमकदार उपन्यास बताया है और कहा है कि ये पुस्तक चेतावनी भी देती है और अमरीका के लिए हमारे आकर्षण को भी बयां करती है.
पाँच निर्णायकों में से चार ने पियर के नाम का समर्थन किया था.
निर्णायक मंडल के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर जॉन कैरी ने कहा,"इस उपन्यास की भाषा अत्यंत सजीव, मौलिक, उत्साहजनक और मज़ेदार है."
35 साल पहले शुरू किया गया ब्रिटेन का बुकर पुरस्कार पिछले एक वर्ष में राष्ट्रमंडल देशों या आयरलैंड में लिखे गए सर्वश्रेष्ठ उपन्यास के लिए दिया जाता है.
इस साल बुकर पुरस्कार के लिए जिन लेखकों के नाम सामने आए थे उनमें बांग्लादेशी लेखिका मोनिका अली के उपन्यास ब्रिक लेन की बड़ी चर्चा थी.
साथ ही मार्गरेट अटवुड, डेमन गैल्गट, ज़ो हेलर और क्लेर मोराल के नाम भी इस साल के बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित हुए थे.
आत्मग्लानि
ये पैसा मेरी जेब तक पहुँच भी नहीं पाएगा. मेरे देनदार अगर यहाँ नहीं हैं तो मुझे पक्का विश्वास है कि अगले मिनट वे यहाँ आ धमकेंगे.
डर्टी बट क्लीन पियर यानी इस वर्ष के बुकर पुरस्कार विजेता ने कुछ ही दिन पहले ये स्वीकार किया था कि उनके जीवन का एक अच्छा-खासा हिस्सा मादक द्रव्यों के साथ बीता.
उन्होंने बताया कि नशे के कारण उन्होंने अपने एक दोस्त का घर बेच डाला और उसके पैसे हजम कर गए.
उनका कहना है कि वे पुरस्कार में मिली राशि से अपने कर्ज़ का भुगतान करेंगे.
उन्होंने बीबीसी को बताया,"ये पैसा मेरी जेब तक पहुँच भी नहीं पाएगा. मेरे देनदार अगर यहाँ नहीं हैं तो मुझे पक्का विश्वास है कि अगले मिनट वे यहाँ आ धमकेंगे".
उन्होंने कहा कि उनको लगता है कि पुरस्कार की धनराशि उनपर जितना कर्ज़ है उसका बस एक तिहाई हिस्सा है.