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पश्चिम तट से क़ैदियों को निकालेगा इसराइल

इसराइली सेना ने फ़लस्तीन के 15 क़ैदियों को पश्चिम तट से निकालकर गज़ा पट्टी भेजने का फ़ैसला किया है.

संवाददाताओं का कहना है कि ये निर्णय इसलिए अभूतपूर्व माना जा सकता है क्योंकि ऐसा निष्कासन पहले सिर्फ़ एक बार ही हुआ है.

पिछले साल फ़लस्तीनी आत्मघाती हमलावरों के तीन संबंधियों को पश्चिमी तट से गज़ा भेज दिया गया था और उम्मीद की जा रही थी कि इससे भावी हमले रोके जा सकेंगे.

इस तरह ज़बरदस्ती लोगों को बाहर निकालने का मानवाधिकार संगठन विरोध करते रहे हैं और उनका कहना है कि ये अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध भी है.

मगर पिछले साल हुए इन निष्कासनों पर इसराइल के सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी थी.

बीबीसी की यरुशलम स्थित संवाददाता बार्बरा प्लेट का कहना है कि हाइफ़ा में पिछले दिनों हुए हमले के बाद ये कार्रवाई फिर करने का फ़ैसला किया गया है.

उस हमले में 20लोगों की जान गई थी.

जिन क़ैदियों को निष्कासित किया जाना है उनमें से किसी पर भी कोई मामला नहीं चल रहा है और न ही उनके विरुद्ध कोई आरोप ही हैं, मगर उन पर चरमपंथी संगठनों के साथ संबंध रखने का आरोप है.

सैनिक सूत्रों का कहना है कि जिन 15 लोगों को निष्कासित किया जाना है उन्हें पश्चिम तट में ही पकड़ा गया था.

उनमें हमास और इस्लामिक जिहाद जैसे फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठनों के लोग भी शामिल हैं.

उन पर इसराइल में हमले कराने का शक भी है.

अपील का मौका

बीबीसी संवाददाता के अनुसार उन क़ैदियों को इरेज़ क्रॉसिंग स्थित इसराइली केंद्र में रखा गया है और ये क्षेत्र गज़ा पट्टी की सीमा पर है.

वैसे उन लोगों के पास अपील के लिए 48 घंटे का समय है.

एएफ़पी समाचार एजेंसी के अनुसार केंद्रीय क्षेत्र के सैनिक कमान के जनरल मोशे कैप्लिंस्की ने उन क़ैदियों के निष्कासन के आदेश पर हस्ताक्षर किए.

सैनिक सूत्रों के अनुसार ये क़दम इसराइली हमले रोकने के लिए किए जा रहे हैं.