राजशाही के तले चल रहे सऊदी अरब में पहली बार चुनाव कराने की घोषणा की गई है.
पहली बार स्थानीय परिषदों के चुनाव कराने के इस फ़ैसले को राजनीतिक सुधारों का पहला संकेत माना जा रहा है.
सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने ख़बर दी है कि सरकार ने चुनाव के ज़रिए स्थानीय मामलों में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया है.
इन सुधारों के तहत परिषद के आधे सदस्यों का चुनाव होगा.
सऊद राजवंश के तहत 1932 में गठित हुए इस राज्य में पहले कभी कोई चुनाव नहीं हुआ.
एजेंसी के अनुसार एक साल के भीतर ही ये चुनाव करा लिए जाएँगे.
ये घोषणा उस समय की गई है जब राजधानी रियाद में सोमवार से ही मानवाधिकारों को लेकर एक सम्मेलन हो रहा है.
सम्मेलन और दबाव
देश में अपने तरह का ये पहला सम्मेलन है.
दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ता और विशेषज्ञ इस दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं.
बीबीसी के मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञ रोजर हार्डी ने रियाद से ख़बर दी है कि 'शांति और युद्ध में मानवाधिकार' विषय पर हो रहे इस सम्मेलन को देश में काफ़ी अहमियत दी जा रही है.
इस सम्मेलन के एजेंडा में महिलाएँ और बच्चे प्रमुख रूप से शामिल होंगे.
संवाददाता का कहना है कि सऊदी अरब पर अपनी विभिन्न संस्थाओं में सुधार करने का दबाव बना हुआ है.
इसी साल 12 मई को रियाद में हुए बम हमले के बाद इस मसले ने और ज़ोर पकड़ा. उस हमले में 35 लोग मारे गए थे जिनमें नौ हमलावर भी थे.
इसके अलावा 11 सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए हमले में भी सऊदी नागरिकों की प्रमुख भूमिका बताई गई थी.
अमरीकी राजनीतिज्ञों और विश्लेषकों ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया कि वहाँ कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है.