इराक़ पर अमरीकी प्रस्ताव कुछ संशोधनों के साथ संयुक्त राष्ट्र में पेश किया जाना है.
लक्ज़मबर्ग में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल राजनयिकों ने कहा है कि संशोधित प्रस्ताव सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों को देना शुरु कर दिया गया है.
शुरुआत में अमरीका प्रस्ताव को ज़रूरी समर्थन न मिल पाने के कारण इस प्रस्ताव में संशोधन किया गया है.
पहले के प्रस्ताव का सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों के अलावा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी निंदा की थी और कहा था कि इससे इराक़ में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका नहीं बढ़ेगी.
अमरीका इस प्रस्ताव के माध्यम से इराक़ में शांति रक्षक सैनिक भेजना चाहता है और वहाँ पुनर्निर्माण भी कराना चाहता है.
संशोधित प्रस्ताव को ब्रिटेन और स्पेन का समर्थन प्राप्त है.
हालाँकि इस प्रस्ताव के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन फ़्रांस का कहना है कि वह इसका अध्ययन करेगा.
प्रगति
फ़्रांस के विदेश मंत्री डोमिनिक डी विलेपाँ ने कहा है कि नए प्रस्ताव में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन वे पहले इसे देखना चाहेंगे.
लक्ज़ेमबर्ग में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में वे भी शामिल हुए.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने बैठक में उम्मीद जताई कि इस सप्ताह इस प्रस्ताव पर मतदान हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि संशोधनों में कई देशों की आपत्तियों का ख़्याल रखा गया है.
लेकिन बीबीसी के संयुक्त राष्ट्र संवाददाता ग्रेग बरो का कहना है कि संशोधित प्रस्ताव पहले प्रस्ताव से बहुत ज़्यादा भिन्न नहीं है.
दो सप्ताह पहले फ़्रांस और जर्मनी ने अमरीकी प्रस्ताव पर ऐतराज जताया था.
दरअसल अमरीकी प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र को ज़्यादा भूमिका नहीं दी गई थी, जिसे ये दोनों देश ज़रूरी मान रहे थे.
इन देशों की एक दूसरी माँग इराक़ियों को सत्ता के हस्तांतरण में समय सीमा तय करना था.
लेकिन अमरीका का कहना था कि जब तक वहाँ सुरक्षा स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, ऐसा नहीं किया जा सकता.
संयुक्त राष्ट्र यह भी चाहता है कि पहले इराक़ में चुनाव हों फिर वहाँ संविधान बने लेकिन अमरीका चाहता है कि संविधान बनने के बाद ही वहाँ चुनाव हों.