इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ईरान की शिरीन एबादी को चुना गया है जो मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए सक्रिय हैं.
56 साल की मानवाधिकार कार्यकर्ता एबादी ने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए काफ़ी काम किया है.
नॉर्वे में नोबेल पुरस्कार देनेवाली समिति ने कहा कि उन्हें ये पुरस्कार मानवाधिकार और ईरान में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के सिलसिले में किए जा रहे उनके काम को देखते हुए दिया जा रहा है.
समिति ने कहा कि एक वकील, न्यायाधीश, लेखिका और कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने ईरान और ईरान की सरहदों के बाहर भी अपनी आवाज़ उठाई है.
उन्होंने ईरानी महिला को साहसी बताया और कहा कि उन्होंने कभी भी अपने बारे में किसी भी ख़तरे की परवाह नहीं की.
पहली महिला न्यायाधीश
शिरीन एबादी का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर तब आया जब वे ईरान की पहली महिला न्यायाधीश बनीं.
मगर 1979 की ईरानी क्रांति के बाद उन्हें दबाव के कारण अपना पद छोड़ना पड़ा.
शिरीन एबादी 1901 में नोबेल पुरस्कार की शुरूआत के बाद से नोबेल पुरस्कार पाने वाली ग्यारहवीं महिला हैं.
नोबेल पुरस्कार पानेवाली वे तीसरी मुस्लिम महिला हैं.
इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 165 लोगों का नामांकन हुआ था.
पोप जॉन पॉल द्वितीय और चेक गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति वाक्लाव हावेल का भी नामांकित किया गया था.
एबादी को ये पुरस्कार 10 दिसंबर को दिया जाएगा जिस दिन अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि है.
पुरस्कार में एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर की राशि दी जाएगी.