दक्षिण अफ़्रीका के लेखक जॉन मैक्सवेल कूट्सी को इस वर्ष के नोबेल साहित्य पुरस्कार के लिए चुना गया है.
18 सदस्यीय स्वीडिश एकेडमी ने कूट्सी के नाम का चयन किया. वैसे पिछले कुछ वर्षों से कूट्सी को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा था.
इसके पहले कूट्सी अपने उपन्यास 'डिसग्रेस' और 'लाइफ़ एंड टाइम्स ऑफ़ माइकल के' के लिए दो बार बुकर पुरस्कार भी जीत चुके हैं.
कूट्सी इस समय शिकागो विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं लेकिन अपने गृह नगर केपटाउन से उनका लगाव बना हुआ है.
कूटसी के नोबेल साहित्य पुरस्कार के लिए चुने जाने की ख़बर का केपटाउन में स्वागत हुआ है.
कूटसी 1980 से नोबेल साहित्य पुरस्कार जीतने वाले चौथे अफ़्रीकी लेखक हैं.
ख़ास शैली
कूट्सी अपने उपन्यास से पाठकों को मंत्रमुग्ध कर देने के लिए ख़ास तौर पर जाने जाते हैं.
1940 में केपटाउन में जन्मे कूट्सी शुरू से ही अंग्रेज़ी के माहौल में पले-बढ़े.
गंभीर लेखक के रूप में कूट्सी को रंगभेद नीति के माहौल की ज़िंदगी से भी जूझना पड़ा लेकिन उनके उपन्यास उनके आसपास की ज़िंदगी का सीधा विवरण नहीं है.
कूट्सी ने अपने साहित्य में इसका वर्णन बड़े असरदार तरीक़े से कि किया है कि दक्षिण अफ़्रीकी समाज के दबाव में लोगों का जीवन कैसे प्रभावित हुआ.
लेकिन अपनी कहानियों में इन विषयों को वास्तविक की बजाय सांकेतिक रूप से छूने की उनकी कला ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दी.
जानकार कहते हैं कि इस तरीक़े का लेखन आसान नहीं होता.
कूट्सी अंग्रेज़ी के महानतम लेखकों में से एक हैं लेकिन यह अजीब बात ही है कि दक्षिण अफ़्रीका में उनके पाठकों की संख्या बहुत ज़्यादा नहीं है.
कूट्सी ख़ुद साधारण जीवन जीते हैं और प्रचार प्रसार से भी दूर ही रहते हैं.