एक कैंसर मरीज़ की दास्तां

प्रकाशित

अज़रबैजान में हर साल 450 से ज़्यादा महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर का पता चलता है.

फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, साल 2013 में पता चला कि सारा को सर्वाइकल कैंसर था.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, अपनी बीमारी के बारे में उन्हें तब पता चला जब वह अपने पति से तलाक़ लेकर अपनी मां के साथ रहने आ गई थीं.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, शुरुआत में डॉक्टर्स ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया क्योंकि कैंसर बहुत फैल चुका था.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, फिर एक डॉक्टर ने चुनौती स्वीकार की और उनका ऑपरेशन किया. ऑपरेशन के बाद सारा की अन्य डॉक्टरों ने जांच की और अब उनका इलाज चल रहा है.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, उनके इलाज का कोई फ़ायदा नहीं हुआ. सारा अब भी अपनी बीमारी से जूझ रही हैं.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, उनकी मां तमारा उनका ख़्याल रखती हैं.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, चूंकि परिवार के पास सारा के इलाज के लिए पैसा नहीं था इसलिए उन्हें बैंक से ऋण लेना पड़ा.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, सारा को सरकार के दावों के विपरीत ऑन्कोलॉजी मरीज़ों (ट्यूमर या रसौली के मरीज़) को दी जाने वाली सहायता में से कुछ नहीं मिला. कानूनन कैंसर के मरीज़ों को स्वास्थ्य जांच और दवाइयां मुफ़्त मिलनी चाहिएं.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, अपने दो बेटों में से एक रॉफ़ के साथ सारा. विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2008 की रिपोर्ट के अनुसार अज़रबैजान में हर साल 450 से ज़्यादा महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर का पता चलता है. इनमें से 230 से ज़्यादा महिलाओं की मौत हो जाती है.
फ़ोटोग्राफ़र जहांगीर यूसुफ़
इमेज कैप्शन, एक ओर तो गंभीर बीमारी और दूसरी ओर बच्चों का भविष्य- परिवार के लिए दोनों में संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. सभी तस्वीरें जहांगीर यूसुफ़, बीबीसी अज़ेरी डॉट कॉम के लिए.