तुर्की की सत्ता में फिर आएंगे अर्दोआन या 'कमाल गांधी' को मिलेगा मौका

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इस रविवार यानी 14 मई को तुर्की में छह करोड़ लोग, राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव के लिए मतदान करेंगे, जो तुर्की के हाल के इतिहास में सबसे निर्णायक साबित हो सकते हैं.

राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन बीस साल से ज़्यादा समय से तुर्की की सत्ता पर क़ाबिज़ हैं और उनके सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है.

तुर्की में इस साल फ़रवरी में आया विनाशकारी भूकंप चुनाव में एक और बड़ा मुद्दा बन गया है. भूकंप की वजह से तुर्की में लगभग 50 हज़ार लोग मारे गए.

राष्ट्रपति अर्दोआन और उनकी पार्टी की इस बात के लिए काफ़ी आलोचना हुई है कि सरकारी मशीनरी ने भूकंप के बाद मदद में सुस्ती दिखाई.

साथ ही कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री की समस्याएं भी सामने आईं जिससे सरकार की और भी ज़्यादा आलोचना हुई. तुर्की में बेरोज़गारी बढ़ी है और मुद्रा लीरा में गिरावट आई है.

अर्दोआन को इस चुनाव में चुनौती दे रहे हैं तुर्की के गांधी कहे जाने वाले कमाल कलचदारलू जो रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी के नेता हैं जो तुर्की की राजनीति में प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में है.

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