You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अतीक़ अहमद: हीरो या विलेन...यहां देखिए पूरी दास्तां
इलाहाबाद में अतीक़ अहमद की गुंडई और ज़रूरतमंदों को मदद करने की कहानियाँ भरी पड़ी हैं. अतीक़ और उनके भाई अशरफ़ की एक गुंडई का वाक़या इलाहाबाद सीटी के एसपी रहे लालजी शुक्ला बताते हैं. बात 1996 की है. तब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू था.
लालजी शुक्ला तब पुलिस अधीक्षक यमुना पार के पद पर तैनात थे. अशोक साहू इलाहाबाद में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के रहने वाले थे. सिविल लाइंस में ही अशोक साहू और अतीक़ के छोटे भाई अशरफ़ के बीच पार्किंग को लेकर विवाद हो गया. अशोक साहू को नहीं पता था कि जिससे बहस हुई है, वह अतीक़ अहमद का भाई अशरफ़ है. जब पता चला तो साहू डर गए. इसी डर के कारण उन्होंने अतीक़ अहमद से माफ़ी मांगी. लेकिन अतीक़ अहमद को यह बात बहुत बुरी लगी.
अतीक़ अहमद ने साहू से कहा कि ठीक है जाओ लेकिन तुमने अच्छा नहीं किया है.
अशोक साहू को लग रहा था कि उन्होंने माफ़ी मांग ली है तो अब कुछ नहीं होगा. लालजी शुक्ला कहते हैं, ''दो दिन बाद ही 19 जनवरी 1996 की शाम को अशरफ़ ने अशोक साहू की हत्या कर दी. यह हत्या अशरफ़ ने अतीक़ अहमद की शह पर की थी. हत्या की ख़बर हुई तो मैं भी घटनास्थल पर पहुँचा."
"अतीक़ के ख़िलाफ़ अशोक साहू के परिवार वालों ने मुक़दमा दर्ज कराया. तब सीनियर एसपी रजनीकांत मिश्र ने मुझे इस मामले को देखने के लिए कहा. जाँच के बाद चौंकाने वाले तथ्य आए. हत्या के वक़्त अशरफ़ को चंदौली में अवैध हथियार रखने के मामले में गिरफ़्तार दिखा दिया गया. यह कैसे संभव था कि अशरफ़ ने इलाहाबाद में हत्या की और उसी वक़्त इलाहाबाद से क़रीब 200 किलोमीटर दूर चंदौली में गिरफ़्तार दिखाया जा रहा है. लेकिन अतीक़ अहमद के बचने का यह पुराना तरीक़ा था.''
वीडियो: रजनीश कुमार और देवाशीष कुमार
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमेंफ़ेसबुक, ट्विटर,इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)