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भारत-पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप, लेकिन फ़ायदा किसे?
"जब भारत में किसी विषय से जनता की तवज्जो कोशिश के बावजूद हटाना मुश्किल हो रहा हो, या फिर चुनाव अभियान फीका चल रहा हो तो फिर पाकिस्तान बलि का मसालेदार बकरा बन जाता है और जब पाकिस्तान में मामले सरकार के काबू में ना आ रहे हों तो फिर भारत को आड़े हाथों लेकर, असल मुद्दे को इस गर्म कंबल के नीचे छिपाने की कोशिश की जाती है."
"इंडिया पाकिस्तान के संबंध दुश्मनी से ज़्यादा एक लाभदायक उद्योग हैं. आरोप और फिर उससे कड़े आरोप, दरअसल... इस उद्योग के शेयर्स की क़ीमत बढ़ाने का हथियार हैं."
भारत-पाकिस्तान रिश्ते के एक और पहलू पर वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान का व्लॉग.
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