भारत में लोगों को क्यों नहीं मिल पा रही नौकरियां?
प्रकाशित
भारत में बीते 8 साल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दोगुना बढ़ा है, लेकिन बेरोज़गारी दर में कमी नहीं आई है.
सरकारी परिभाषा के मुताबिक़, अगर सात दिनों में एक घंटा भी कोई नौकरी या दिहाड़ी मजदूरी करता है - तो माना जाता है कि वो बेरोज़गार नहीं है.
रोज़गार की ये परिभाषा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की है, जिसे दुनिया के बाक़ी देश भी मानते हैं ताकि बेरोज़गारी के आंकड़ों की तुलना की जा सके.
आख़िर क्यों नहीं मिल रही है नई नौकरियां?
देखिए सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी यानी CMIE के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश व्यास से बीबीसी संवाददाता सरोज सिंह की बातचीत.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)