बेटे की बेटी बनने की ख़्वाहिश के आगे नहीं सुनी समाज की

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निशा हमेशा से निशा नहीं थी. मां-बाप उन्हें बेटा ही समझते रहे. लेकिन निशा को कुछ और ही महसूस हो रहा था. जिसे पहले किसी ने बर्दाश्त नहीं किया, उसे बाद में हर किसी ने स्वीकार किया. ऐसी ही है ट्रांसजेंडर निशा की ये कहानी. बीबीसी के सहयोगी सुंदर नटराजन की रिपोर्ट.

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