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गोरखपुर में आदित्यनाथ योगी की सबसे बड़ी परीक्षा
कहते हैं कि गोरखपुर की सियासत में एक भी पत्ता गोरखनाथ मठ की मर्जी के बिना नहीं हिलता. बात साल 2002 की है, जब योगी गोरखपुर में बीजेपी के खिलाफ़ खड़े थे.
बीजेपी ने जिसे विधानसभा का टिकट दिया वो योगी आदित्यनाथ को पसंद नहीं था, इसलिए विरोध में उन्होंने हिंदू सभा से अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया.
ये पहली बार था जब मठ खुलेआम बीजेपी के खिलाफ़ हिंदू महासभा के उम्मीदवार का समर्थन कर रहा था. जिस बीजेपी से शिवप्रताप शुक्ला चार बार चुनाव जीत रहे थे वो इस बार चुनाव हार गए.
इस चुनाव ने बीजेपी के हाईकमान को ये मैसेज दे दिया कि योगी आदित्यनाथ और मठ गोरखपुर की राजनीति में क्या दम रखते हैं. बीस साल बाद 2022 में योगी आदित्यनाथ एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने की कोशिश में हैं.
उत्तर प्रदेश और ख़ास तौर से गोरखपुर में उनके सामने बड़ा इम्तहान खड़ा है. नतीजा क्या होगा?
वीडियो: कीर्ति दुबे और देवाशीष कुमार
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