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सीडीएस बिपिन रावत की मौत से भारत की चीन नीति पर असर पड़ेगा?
भारतीय सेना के चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल विपिन रावत का बुधवार को हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया. इस हादसे में जनरल रावत की पत्नी समेत कुल 13 लोगों की मौत हो गई.
जनरल रावत की मौत भारतीय सेना के लिए एक बड़ा झटका है और विश्लेषक मानते हैं कि इसकी भरपाई आसान नहीं होगी.
भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल रावत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पद के लिए चुना था. मोदी सरकार ने ही उन्हें दो अधिकारियों पर तरजीह देकर 2016 में देश का सेना प्रमुख बनाया था. जनरल रावत ने चीन की आक्रामक नीति के ख़िलाफ़ भारत की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया और 2017 में डोकलाम में और 2020 में गलवान में चीनी आक्रामकता का मुक़ाबला किया. भारत के रक्षा विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने उनकी मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्विटर पर कहा, "भारत के चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल रावत की मौत ऐसे मुश्किल समय में हुई है जब सीमा पर बीस महीनों से चले आ रहे चीन के आक्रामक रवैये ने हिमालय के मोर्चे पर युद्ध जैसे हालात पैदा किए हैं." एक और ट्वीट में चेलानी ने कहा, "स्पष्टवादी और साफ़ नज़रिए वाले जनरल रावत चीन की आक्रामकता के ख़िलाफ़ भारत का चेहरा थे. जहां राजनीतिक नेतृत्व की ज़बान से 'चीन' शब्द नहीं निकल रहा था, तब जनरल रावत साफ़-साफ़ नाम ले रहे थे."
रिपोर्ट: दिलनवाज़ पाशा
आवाज़: भरत शर्मा
वीडियो एडिटिंग: मनीष जालुई
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