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तालिबान ने पूर्व राष्ट्रपति नजीबुल्लाह को ऐसे दी थी दर्दनाक मौत
नजीबुल्लाह संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर में साढ़े चार सालों तक रहे. 27 सितंबर, 1996 को यूएनओ के दफ़्तर में अपने कमरे से नजीबुल्लाह अपने हत्यारों के नज़दीक आने की आवाज़ साफ़ सुन सकते थे.
काबुल पर तालिबान की फ़तह के दौरान दागे गए गोले और रॉकेट की आवाज़ उनके लिए आगे बढ़ते जल्लाद की पदचाप की तरह थी.
डेढ़ बजे संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर के बाहर तालिबानी सैनिकों के 15 पिक अप ट्रक आ कर रुके.
तालिबान के लड़ाके संयुक्त राष्ट्र के काबुल दफ्तर में घुस आए. उन्होंने नौकर से पूछा नजीबुल्लाह कहां हैं ?
उसने कुछ बहाना बनाने की कोशिश की लेकिन वो उसे धक्का देते हुए अंदर घुस गए और भवन की तलाशी लेने लगे. कुछ ही देर में उन्होंने नजीब को उनके भाई शाहपुर यूसुफजई, अंगरक्षक जाफसर और सचिव तुखी के साथ ढूंढ लिया.
नजीबुल्लाह को खींच कर उनके कमरे से निकाला गया. उन्हें मारा पीता गया और उनके गुप्तांगों को काट लिया गया और सिर में गोली मार कर पहले क्रेन पर लटकाया गया और फिर राजमहल के पास एक लैंप पोस्ट पर टांग दिया गया.
जब लोगों की उनपर नज़र पड़ी तो उनके मृत शरीर की आंखें सूजी हुई थी और उनके मुंह में जबरदस्ती सिगरेट ठूंस दी गई थी और उनकी जेब में ठूंसे गए करेंसी नोट भी साफ़ दिखाई दे रहे थे.
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