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तालिबान सरकार पाकिस्तान के लिए जीत और भारत के लिए झटका क्यों है?
तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में जिस अंतरिम सरकार की घोषणा की है, उसे लेकर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की छाप प्रमुखता से दिख रही है.
कट्टरपंथी और रहबरी-शूरा काउंसिल के प्रमुख मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद अफ़ग़ानिस्तान के नए प्रधानमंत्री होंगे. ये वही मुल्ला अखुंद हैं जिन्होंने 2001 में बामियान में बुद्ध की मूर्तियाँ तुड़वाई थीं.
मुल्ला हसन से पहले कयास लगाया जा रहा था कि क़तर स्थित दोहा में तालिबान के राजनीतिक दफ़्तर के प्रमुख अब्दुल ग़नी बरादर को अफ़ग़ानिस्तान की कमान मिल सकती है.
इससे पहले तालिबान के नेतृत्व में सरकार बनाने पर सहमति नहीं बन पा रही थी. तभी पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख जनरल फ़ैज़ हामिद काबुल पहुँचे थे और उनके पहुँचने के तीन दिन बाद तालिबान ने नई सरकार के शीर्ष नेतृत्व की घोषणा कर दी.
रिपोर्ट: टीम बीबीसी
आवाज़: नवीन नेगी
वीडियो एडिटिंग: रुबाइयत बिस्वास
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