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आज़ादी के मौक़े पर भारत-पाक को क्या तोहफ़े चाहिए?: वुसअत की डायरी
टीवी चैनलों पर स्वतंत्रता दिवस से एक हफ्ते पहले ही देश से प्यार बढ़ाने वाले कार्यक्रम रफ्ता-रफ्ता छाने लगते हैं.
जोशीले भाषणों, तरानों और गीतों की रिहर्सल करते बच्चे गली-गली हरे और सफेद चांद तारे वाले परचमों और तिरंगों के साथ दिखते हैं.
बैजेज़, टोपियों और तरह-तरह की चीज़ों का कारोबार चमक उठता है और फिर अगले ही दिन परचमी झंडियां सड़क पर इधर-उधर लुड़कती दिखाई देती हैं.
जीवन फिर पुराने ढर्रे पर चढ़ जाता है. पाकिस्तान और भारत अपनी आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. इस मौक़े पर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान की ख़ास टिप्पणी.
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