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वर्ल्ड इमोजी डे पर जानिए इमोजी का पूरा इतिहास
इन दिनों मोबाइल पर चैटिंग, फ़ोन पर बातचीत करने से ज़्यादा कॉमन हो गई है. और चैट में सबसे ज़्यादा ज़रूरी रोल होता है लोगों का, यानी इमोजी का.
इमोजी मौजूदा दौर में सजावट का सामान नहीं बल्कि ज़रूरत बन गए हैं. इमोजी अब नौजवान पीढ़ी की सनक भर नहीं है बल्कि आप इन्हें डिजिटल दुनिया से पैदा हुई नई ज़बान कह सकते हैं. फ़ोन पर ये छोटे-छोटे कलाकार, बोरिंग टेक्स्ट में इमोशनल तड़का लगाने का काम करते हैं.
बीते कुछ साल से ये इमोजी बातचीत की एक नई भाषा का हिस्सा बन गए हैं. यहां तक कि अब तो कॉरपोरेट मेल और ऑफ़िशियल वॉट्सऐप विंडो में भी ये नज़र आने लगे हैं. साल 2015 में ये जनाब ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी के वर्ड ऑफ द ईयर बने थे.
लेकिन ये इमोजी आए कहां से? इनकी कहानी क्या है? ये हमारे मोबाइल फ़ोन में कैसे पहुंचे?
प्रस्तुति: विदित मेहरा
वीडियो एडिटिंग: देवाशीष कुमार
स्क्रिप्ट: भरत शर्मा
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