You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कोरोना काल में गंगा को जीवनदायिनी से 'शववाहिनी' किसने बनाया?
गंगा भारत की अस्मिता, संस्कृति, धर्म, आस्था, राजनीति और आम जनजीवन से जुड़ी केवल नदी नहीं है, बल्कि इस ढाई हज़ार किलोमीटर लंबी नदी को करोड़ों लोग जीवनदायिनी मानते हैं. कोरोना महामारी के दौरान इसमें तैरती लाशों और इसके कई घाटों पर दफ़्न सैंकड़ों शवों की तादाद से एक समय तो ऐसा लगा जैसे गंगा शव वाहिनी बन गई हो. इन लाशों में बड़ी संख्या कोरोना मरीज़ों की हो सकती है. इन बहती और दफ़्न लाशों का गंगा की सेहत, नदी के आसपास रह रहे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा? मानसून की बारिश के दौरान स्थिति और भयानक होने की आशंका है. इन्हीं सवालों की पड़ताल के साथ प्रयागराज से रूपा झा की रिपोर्ट.
शूट: पवन जैशवाल
एडिट: नेहा शर्मा
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)