गूगल के ख़िलाफ़ केस जीतने वाली महिला

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शैनॉन दरअसल गूगल में ठेके पर काम करती थीं. इसका मतलब यह है कि वो काम तो गूगल के लिए कर रहीं थीं लेकिन उन्हें नियुक्त एक मोडीज़ नाम की कंपनी ने किया था. यह एडेको नाम की एक कंपनी का हिस्सा है जिसकी ऐसी कई कंपनियां हैं. गूगल में इस तरह ठेके पर काम कराना सामान्य बात होती जा रही है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल में आधे कर्मचारी ऐसे हैं जो ठेके पर काम करते हैं. शैनॉन कहती हैं कि जब महामारी आई तो उनका काम मुश्किल होता गया. शैनॉन ने पाया कि कंपनी में स्थायी तौर पर अस्थायी कर्मचारी रखने की संस्कृति बढ़ती जा रही है.

वह कहती हैं कि कंपनी में ऐसे अस्थायी कर्मचारी कई थे जो कभी स्थायी नहीं होने वाले, भले वे कितनी भी कोशिश क्यों न कर लें. शैनॉन कहती हैं कि वो प्रंबधन के रवैये से खीज रहीं थीं और फिर वो पल आ गया जब उन्होंने अपना आपा खो दिया.

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