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ख़तना होने के बाद कैसे बदल गई इन लड़कियों की ज़िंदगी
लैला (असली नाम नहीं) उस समय सिर्फ़ 11 या 12 साल की थीं, जब उनका ख़तना कर दिया गया. मिस्र के रूढ़िवादी मुस्लिम समुदायों, ख़ास कर ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले लोग मानते हैं कि जब तक महिलाओं के जननांग का एक हिस्सा काट नहीं दिया जाता तब तक उन्हें 'स्वच्छ' और 'शादी के योग्य' नहीं समझा जाता.2008 से पूरे मिस्र में इस चलन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. अगर कोई डॉक्टर इस तरह का ख़तना करने का दोषी पाया जाता है तो उसे सात साल साल की जेल हो सकती है. अगर कोई ख़तना कराने की इच्छा जताता है तो उसे भी तीन साल की जेल की हवा खानी पड़ सकती है. इन कड़ी सज़ाओं के बावजूद मिस्र उन देशों में शामिल है, जहाँ महिलाओं का ख़तना करने की दर सबसे ज़्यादा है. महिलाओं के मुक़दमे मुफ़्त में लड़ने वाले मानवाधिकार मामलों के वकील रेडा एल्डनबॉकी का कहना है कि आजकल ख़तने की यह प्रक्रिया 'प्लास्टिक सर्जरी' करने के बहाने निपटाई जाती है. रेडा महिलाओं के मुक़दमे लड़ने के लिए बनाए गए सेंटर के प्रमुख भी हैं.
स्टोरी: सरोज पथिराना
आवाज़: गुरप्रीत सैनी
वीडियो एडिटिंग: दीपक जसरोटिया