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कहानी ज़िंदगी की - 11: सुखांत
ये है बीबीसी हिंदी का ताज़ातरीन पॉडकास्ट 'कहानी ज़िंदगी की'
'कहानी ज़िंदगी की' के हर एपीसोड में रूपा झा आपको सुना रही हैं भारतीय भाषाओं में लिखी ऐसी चुनिंदा कहानियां जो अपने आप में बेमिसाल हैं, जो हमारी और आपकी ज़िंदगी में झांकती हैं और सोचने को मजबूर भी करती हैं.
इस बार की कहानी है सुखांत.
ये मूल रूप से तेलुगू में लिखी गई कहानी 'सुखांतम्' का हिंदी अनुवाद है.
ये कहानी तेलुगू भाषा की चर्चित लेखिका अबूरी छायादेवी ने लिखी है.
अबूरी छायदेवी ने इस कहानी के ज़रिए महिलाओं की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बयां किया है कि कैसे एक महिला को जीवन भर चैन की नींद नसीब नहीं होती.
बच्चे से लेकर बड़े होने तक वो किस तरह से एक अच्छी नींद के लिए तरसती है.
कहानी- सुखांत (मूल नाम- सुखांतम् )
लेखिका- अबूरी छायादेवी
हिंदी अनुवाद- डॉ. जे.लक्ष्मी रेड्डी
वाचन - रूपा झा
ऑडियो मिक्सिंग- जितेंद्र सासन
इलस्ट्रेशन- गोपाल शून्य
आलाप- शिल्पी
प्रस्तुतकर्ता- मोहन लाल शर्मा
नोटः ये इस सीज़न की अंतिम कहानी है, बने रहिए बीबीसी हिंदी के साथ.
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