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कहानी ज़िंदगी की 9: चीफ़ की दावत
ये है बीबीसी हिंदी का ताज़ातरीन पॉडकास्ट 'कहानी ज़िंदगी की'
'कहानी ज़िंदगी की' के हर एपीसोड में रूपा झा आपको सुना रही हैं भारतीय भाषाओं में लिखी ऐसी चुनिंदा कहानियां जो अपने आप में बेमिसाल हैं, जो हमारी और आपकी ज़िंदगी में झांकती हैं और सोचने को मजबूर भी करती हैं.
इस बार की कहानी है चीफ़ की दावत.
ये कहानी भीष्म साहनी ने लिखी है. उन्हें प्रेमचंद के बाद के सबसे महत्वपूर्ण कथाकारों में से एक माना जाता है. उन्होंने 'तमस' जैसा कालजयी उपन्यास और 'कबीरा खड़ा बाज़ार में' जैसा चर्चित नाटक लिखा.
भीष्म साहनी की भाषा पंजाबी थी. वो अंग्रेजी पढ़ाते थे लेकिन उन्होंने हिंदी साहित्य में नए प्रतिमान रचे. भीष्म साहनी का जन्म 8 अगस्त 1915 को रावलपिंडी (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था.
उन्होंने गुरुकुल में हिंदी और संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की और बाद में उर्दू और अंग्रेज़ी माध्यम से स्कूली शिक्षा हासिल की. लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से बीए और एमए किया.
भीष्म साहनी ने 16 वर्ष की आयु से ही लिखना प्रारम्भ कर दिया था. उन्होंने विभिन्न तरह की रचनाएँ लिखीं, जिनमें कहानी, उपन्यास, नाटक, संस्मरण और अनेक लेख शामिल हैं.
कहानी- चीफ़ की दावत
लेखक- भीष्म साहनी
वाचन - रूपा झा
ऑडियो मिक्सिंग- जितेंद्र सासन
इलस्ट्रेशन- गोपाल शून्य
आलाप- शिल्पी
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