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भारतीय सेना की इस रणनीति के कारण क्या चीन पीछे हटने को मजबूर हुआ
रक्षा विशषज्ञों का मानना है कि चीन और भारत के बीच हुए समझौते के बाद जल्द ही पूर्वी लद्दाख में 'लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल' (वास्तविक नियंत्रण रेखा) यानी 'एलएसी' पर फ़िंगर-3 और फ़िंगर-8 के बीच के इलाके को फिर से 'नो मेंस लैंड' के रूप में बहाल कर दिया जाएगा. लेकिन फ़िलहाल इस इलाके में ना तो चीन और ना ही भारत की सेना गश्त लगाएगी.
ये व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक इस पर दोनों देशों की सेना के बीच कोई 'आम सहमति' नहीं बन जाती है. सामरिक मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार अभिजीत अय्यर मित्रा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि 'सैटेलाइट' से जो तस्वीरें इस वक़्त मिल रही हैं उन्हें देखकर पता लग रहा है कि पेंगोंग-त्सो के दक्षिणी इलाके की तुलना में स्पांगुर के इलाके से चीन की 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी' (पीएलए) तेज़ी से पीछे हट रही है. उनका कहना है कि अब तक जो तस्वीरें सामने आयी हैं, उनके हिसाब से चीन की सेना दस किलोमीटर तक पीछे हट चुकी हैं.
स्टोरी: सलमान रावी
आवाज़: मानसी दाश
वीडियो: रुबाइयत बिस्वास
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